साठ के ठाठ!

गुड़गांव के कुछ बुज़ुर्ग साठ साल के बाद ज़िंदगी से रिटायर होने वाली सोच में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं. उनका उत्साह नौजवानों के हौसले को मात देता है.

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इमेज कैप्शन, गुड़गांव के कुछ बुज़ुर्ग रिटायरमेंट की ज़िंदगी की सोच में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं. उनका उत्साह नौजवानों के हौसले को मात देता लगा जब 'माइल्स टु गो' नाम की दौड़ में बड़ी तादाद में वरिष्ठ नागरिकों ने हिस्सा लिया.
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इमेज कैप्शन, इस दौड़ के ज़रिए लोगों को रोज़ व्यायाम करके बीमारियों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया.
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इमेज कैप्शन, इस दौरान बच्चों ने भी नुक्कड़ नाटक के ज़रिए लोगों को बुज़ुर्गों की देखभाल करने का संदेश दिया.
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इमेज कैप्शन, दौड़ में शामिल लोगों डॉक्टर नीना गुप्ता का कहना था कि असली ज़िंदगी तो साठ साल के बाद ही शुरू होती है.
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इमेज कैप्शन, कार्यक्रम में मौजूद महेंद्र बताते हैं कि उन्हें ड्रम बजाने का शौक था पर समयाभाव के कारण वो इसे आगे न ले जा सके. शौक पूरा करने के लिए अब वह एक अफ़्रीकन ड्रम ग्रुप के साथ काम करते हैं, जहां उन्हें 16 साल का नौजवान होने का अहसास होता है.
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इमेज कैप्शन, प्रतिभागी सीता सूरी का कहना था कि ऐसे आयोजनों से उनका मनोबल बढ़ता है और वह चाहती हैं कि ये थोड़े-थोड़े समय के अंतराल पर होते रहने चाहिए.
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इमेज कैप्शन, आयोजन के यादगार लम्हों को लोगों ने अपने मोबाइल फ़ोन के कैमरों में क़ैद किया.
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इमेज कैप्शन, कार्यक्रम के दौरान गुब्बारों के माध्यम से संदेश दिया गया कि अच्छी सेहत ख़ुशियों की कुंजी है.