पीछे रह गईं विधवाएं..

पंजाब का किसान अगर खेती करता है तो उससे सिर्फ़ कर्ज़ ही उगता है. खेती छोड़ता है तो कर्ज़ के बोझ तले दब जाता है. जब कुछ नहीं सूझता तो सिर्फ़ एक ही विकल्प बचता है. देखिए तस्वीरें क़तार के आख़िरी उन लोगों की जो पीछे छूट गए हैं.

क़तार के आख़िरी, पंजाब, किसान, आत्महत्या
इमेज कैप्शन, बलविंदर सिंह संगरूर के चोटियां गांव के रहने वाले थे जिन्होंने कर्ज़ के चलते 2009 में ख़ुदकुशी कर ली थी. उनकी पत्नी अमरजीत कौर औज दाने-दाने को मोहताज हैं. ज़मीन बिक चुकी है.
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इमेज कैप्शन, अमरजीत ने बताया, ‘‘कभी यहां कभी वहां मज़दूरी करके बच्चों को पाल रही हूं. उसके बाद हमें ब्याज भी देना है और वो लोग आते हैं, पर हम कहां से दें. पूरा घर कर्ज़ में दबा है. हमें तो समझ नहीं आ रहा कि क्या करें?’’
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इमेज कैप्शन, चार बेटियों और एक बेटे के पिता दर्शन सिंह ने पिछले साल आत्महत्या कर ली थी. उन पर ढाई लाख रुपए कर्ज़ था. उनकी पत्नी सुलोचना कहती हैं, ‘‘पहले मकान ले लिया था, उसके बाद ठेके पर ज़मीन ली और इसके बाद बेटी का ब्याह किया. बाद में बेटी का तलाक हो गया. ज़मीन बेच दी. बेटा मेरा बीमार रहता है. कुछ पैसा उसमें लग गया. इसके बाद कर्ज़ा बहुत चढ़ गया और उसकी टेंशन में कर गया खुदकुशी.’’
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इमेज कैप्शन, सुलोचना की बेटियों की पढ़ाई रुक गई है. वो घर में ही रहती हैं. सुलोचना और उनका बेटा दिहाड़ी मज़दूरी करते हैं. अगर वह पढ़ने जाता है तो गैरहाज़िरी बढ़ती हैं. इसलिए पढ़ाई छोड़ दी.
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इमेज कैप्शन, चोटियां गांव के कृशन सिंह ने नौकरी छोड़कर खेती का दामन थामा था. मगर कर्ज़ ने उन्हें मज़दूर बनाकर छोड़ा. उन्होंने पिछले साल 10 मई को ख़ुदकुशी कर ली थी. कृशन सिंह की पत्नी मोहिंदर को टीबी की बीमारी थी. वह अब भी बीमार रहती हैं. मगर मज़दूरी करने जाती हैं क्योंकि रोटी खाने के लिए यह ज़रूरी है.
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इमेज कैप्शन, चोटियां के रहने वाले जैल सिंह की पत्नी ने एक महीने पहले आग लगाकर ख़ुदकुशी की थी. जैल सिंह पर क़रीब सात लाख रुपए कर्ज़ा है, जो ब्याज चुकाने के बाद भी उतरने में नहीं आ रहा था. जैल सिंह कहते हैं कि, ''आग लगाने के बाद जो खर्चा हुआ वह भी आढ़ती से लिया था. कर्ज़ा जो लिया था, वो चुकाएंगे जैसे तैसे. कमाई में से कुछ पैसा दे भी रहे हैं. दोबारा आढ़ती से ही लेंगे, डेढ़ रुपए ब्याज पर''
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इमेज कैप्शन, चोटियां के सरपंच भान सिंह के दस्तख़त से निकले एफ़िडेविट सुबूत हैं कि कर्ज़ कैसे जीते-जागते इंसानों को महज़ नामों में बदल रहा है. वे कहते हैं कि सरकार ने कभी उनसे जानकारी नहीं मांगी कि आख़िर लोग क्यों जान दे रहे हैं?
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इमेज कैप्शन, मूवमेंट अगेंस्ट स्टेट रिप्रैशन के कन्वीनर और पूर्व विधायक इंदरजीत सिंह जेजी कहते हैं, ''मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के समय किसान आयोग ने कहा था कि पीड़ित परिवारों को 50 हज़ार रुपए नक़द और 30 साल के लिए 1500 रुपए पेंशन देंगे मुआवज़े के बतौर. जबकि बादल साहब ने कहा कि दो लाख रुपए नक़द देंगे. उनका कहना था कि देखने में अच्छा लगता है. असल में यह पैसा साहूकार के पास ही जाएगा जो अकाली दल को फ़ंड कर रहा है. अगर पेंशन लगा देते तो किसान बच जाता.''
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इमेज कैप्शन, कपास बेल्ट यानी संगरूर, बठिंडा, मानसा, बरनाला, मुक्तसर और फ़िरोज़पुर ज़िलों में ख़ुदकुशी के सबसे ज़्यादा मामले सामने आए हैं. इसके अलावा केंद्रीय पंजाब यानी लुधियाना, जालंधर, पटियाला, मोहाली, फ़तेहगढ़ साहिब, मोगा और फ़रीदकोट ज़िलों में भी ऐसे केस हुए हैं.
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इमेज कैप्शन, संगरूर के चोटियां गांव में अकेले इसी साल आठ किसानों और खेत मज़दूरों ने कर्ज़ के चलते ख़ुदकुशी की है. पिछले 20 साल में यहां 63 किसान और मज़दूर आत्महत्या कर चुके हैं.
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इमेज कैप्शन, चोटियां गांव में अब तक चुनाव में वोट मांगने के लिए कई नेता आ चुके हैं. इनमें कांग्रेसी और अकाली दल दोनों के नेता शामिल हैं. सरपंच के मुताबिक़ किसी ने आत्महत्या के मुद्दे को छेड़ना ज़रूरी नहीं समझा, फिर भी वोट मांगने से पीछे नहीं हटे.
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इमेज कैप्शन, पंजाब में कर्ज़ के कारण आत्महत्या के मामले 1997 से जारी हैं जब कॉटन बेल्ट में फ़सल खराब हो गई थी. कॉटन बेल्ट यानी दक्षिण पश्चिम इलाक़ों में ऐसे मामले ज़्यादा मिले. भारतीय किसान यूनियन उगराहां ने 2004 में पंजाब के 300 गांवों का सर्वे किया था. जिसमें 3000 किसानों की ख़ुदकुशी का आंकड़ा सामने आया था.
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इमेज कैप्शन, पंजाब सरकार ने राज्य के तीन विश्वविद्यालयों के नेतृत्व में सर्वे कराया और इसके बाद 4600 पीड़ित परिवारों की पहचान की जिनमें कर्ज़ की वजह से ख़ुदकुशी के मामले सामने आए थे. उन्हें दो-दो लाख रुपए मुआवज़ा दिया गया है.
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इमेज कैप्शन, पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, पंजाबी यूनिवर्सिटी और गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी के इस डोर टु डोर सर्वे में साल 2000 से 2010 तक ग्रामीण इलाक़ों में 6926 किसानों और मज़दूरों की ख़ुदकुशी के मामले सामने आए. इनमें से क़रीब 4800 मामलों में कर्ज़ वजह थी.
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इमेज कैप्शन, पंजाब में किसानों की आत्महत्या की इकलौती वजह है कि आढ़तियों से ज़्यादा दर पर कर्ज़ लेना. फ़सल की लगातार घटती क़ीमत से किसान कर्ज़ के मकड़जाल में ऐसा फंसता है कि फिर निकल नहीं पाता. (सभी तस्वीरें -अजय शर्मा/बीबीसी)