ब्रांड की चिप्पी लगते ही क्यों बदल जाती हैं चीज़ें?

सैन फ्रांसिस्को में 'व्हीट इज़ व्हीट इज़ व्हीट' नाम की एक प्रदर्शनी लगाई गई है. इसमें डिज़ाइनर ने यह पड़ताल करने की कोशिश की है क्यों रोज़मर्रा की किराने की चीज़ें किसी बड़े ब्रांड का लेबल लगते ही ख़ास हो जाती हैं?

'एप्पल का आईमिल्क' पेडी मेरगुई
इमेज कैप्शन, सैन फ्रांसिस्को के क्राफ़्ट और डिज़ाइन संग्रहालय में तेल-अवीव के कलाकार डिज़ाइनर पेडी मेरगुई की कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जा रहा है. इसमें डिज़ाइनर ने वैश्विक उपभोक्ता संस्कृति को दिखाने की कोशिश की है. व्वीट इज़ व्हीट इज़ व्हीट नाम की इस प्रदर्शनी में मूलभूत किराने के सामान को जाने-माने लग्ज़री लेबल लगाकर उनकी रीब्रांडिंग की गई है. तस्वीर में 'एप्पल का आईमिल्क' दिखाया गया है.
इस प्रदर्शनी का उद्देश्य देखने वाले की गुणवत्ता को लेकर राय पर सवाल उठाना है और साथ ही डिज़ाइन और नैतिकता के बीच रिक्त की पड़ताल करना है.
इमेज कैप्शन, इस प्रदर्शनी का उद्देश्य देखने वाले की गुणवत्ता को लेकर राय पर सवाल उठाना है और साथ ही डिज़ाइन और नैतिकता के बीच रिक्त की पड़ताल करना है.
म्यूज़ियम के अनुसार, "पेडी मेरगुई के नए और बेहतर 'लग्ज़री' उत्पादों को देखकर हम समझ सकते हैं कि ब्रांड एलाइनमेंट को कुछ ख़ास समूहों द्वारा सफल लाइफ़स्टाइल की पहचान के रूप में कैसे लिया जाता है."
इमेज कैप्शन, म्यूज़ियम के अनुसार, "पेडी मेरगुई के नए और बेहतर 'लग्ज़री' उत्पादों को देखकर हम समझ सकते हैं कि ब्रांड एलाइनमेंट को कुछ ख़ास समूहों द्वारा सफल लाइफ़स्टाइल की पहचान के रूप में कैसे लिया जाता है."
म्यूज़ियम के अनुसार, "उनकी प्रदर्शनी मज़ाकिया तो है ही, वैश्विक उपभोक्ता संस्कृति पर उत्तेजक टिप्प्णी भई है जो हमारी अगली ख़रीद पर सवाल भी खड़े कर रही हो."
इमेज कैप्शन, म्यूज़ियम के अनुसार, "उनकी प्रदर्शनी मज़ाकिया तो है ही, वैश्विक उपभोक्ता संस्कृति पर उत्तेजक टिप्प्णी भई है जो हमारी अगली ख़रीद पर सवाल भी खड़े कर रही हो."
मेरगुई कहते हैं, "इस प्रदर्शनी का उद्देश्य एक डिज़ाइनर के सामने आने वाली चुनौतियों को सामने लाना है, जब वह आर्थिक मुद्दों से जुड़े विषयों पर काम करता है और उसे अपने नैतिक मूल्यों पर खरा भी उतरना है."
इमेज कैप्शन, मेरगुई कहते हैं, "इस प्रदर्शनी का उद्देश्य एक डिज़ाइनर के सामने आने वाली चुनौतियों को सामने लाना है, जब वह आर्थिक मुद्दों से जुड़े विषयों पर काम करता है और उसे अपने नैतिक मूल्यों पर खरा भी उतरना है."
म्यूज़ियम के अनुसार, "प्रदर्शनी में रखी गई कलाकृतियों में तस्वीरें और आकार उपभोक्ता संसार से ली गई हैं और अवधारणाएं ली गई हैं उपभोक्ता नीतियों के क्षेत्र से. कभी-कभी यह उत्पाद की पैकेजिंग से एकपक्षीय संबंध की पड़ताल करता है और उन परिस्थितियों की भी जिनमें एक डिज़ाइनर को काम करना पड़ता है."
इमेज कैप्शन, म्यूज़ियम के अनुसार, "प्रदर्शनी में रखी गई कलाकृतियों में तस्वीरें और आकार उपभोक्ता संसार से ली गई हैं और अवधारणाएं ली गई हैं उपभोक्ता नीतियों के क्षेत्र से. कभी-कभी यह उत्पाद की पैकेजिंग से एकपक्षीय संबंध की पड़ताल करता है और उन परिस्थितियों की भी जिनमें एक डिज़ाइनर को काम करना पड़ता है."
मेरगुई के अनुसार, "प्रदर्शनी में रखी गई सभी चीज़ें एक कलाकृति के रूप में तैयार की गई थीं और रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिलने से ही यह तैयार हो पाई हैं. यह कलाकृतियां को पब्लिश करते वक्त ब्रांडों की प्रतिष्ठा या मूल्यों को किसी तरह की हानि पहुंचाने का उद्देश्य नहीं रहा."
इमेज कैप्शन, मेरगुई के अनुसार, "प्रदर्शनी में रखी गई सभी चीज़ें एक कलाकृति के रूप में तैयार की गई थीं और रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिलने से ही यह तैयार हो पाई हैं. यह कलाकृतियां को पब्लिश करते वक्त ब्रांडों की प्रतिष्ठा या मूल्यों को किसी तरह की हानि पहुंचाने का उद्देश्य नहीं रहा."
इस काम के अलावा डिज़ाइनर पेडी होलोन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में लेक्चरर भी हैं जो ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विज़ुअल कम्युनिकेशन पर लेक्चर देते हैं.
इमेज कैप्शन, इस काम के अलावा डिज़ाइनर पेडी होलोन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में लेक्चरर भी हैं जो ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विज़ुअल कम्युनिकेशन पर लेक्चर देते हैं.
'नाइकी के फल' पेडी मेरगुई
इमेज कैप्शन, पेडी मेरगुई की, व्हीट इज़ व्हीट इज़ व्हीट, प्रदर्शनी 15 जून 2014 तक सैन फ़्रांसिस्को, अमरीका, के म्यूज़ियम ऑफ़ क्राफ़्ट एंड डिज़ाइन में चलेगी.