गरीबी हटी पर विकास कहां

केरल का एर्नाकुलम ज़िला देश के बाक़ी हिस्सों से इसलिए अलग है क्योंकि यहां तक़रीबन हर शख्स का बैंक में खाता है. मगर विकास के लिहाज़ से एर्नाकुलम के गांवों में अभी भी सहूलियतें नहीं हैं. देखिए तस्वीरें.

एर्नाकुलम, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, एर्नाकुलम के रहने वाले विश्वन दो साल पहले तक कर्ज़दार थे. मगर उनका बैंक खाता था. भारतीय रिज़र्व बैंक ने जब सभी के खाते खोलने की योजना शुरू की तो उनका कर्ज़ भी माफ़ हो गया.
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इमेज कैप्शन, कर्ज़ न उतार पाने से विश्वन को ऐसा धक्का लगा कि उनकी सेहत गिरती चली गई. उनकी बाईपास सर्जरी हुई. और इसके बाद उन पर 88 हज़ार रुपए का कर्ज़ और हो गया. हालांकि बैंक खाता खुलवाते समय कराए गए मेडिक्लेम से यह माफ़ हो गया.
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इमेज कैप्शन, विश्वन के परिवार में उनकी पत्नी और उनकी 17 साल की बेटी हैं. वो आज सुखी नज़र आते हैं. मगर जिस ज़मीन पर वह खेती करते हैं वह आज भी उनकी नहीं है.
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इमेज कैप्शन, विश्वन कहते हैं, “मैं सेहत के लिहाज़ से कमज़ोर हूं. पहले की तरह मेहनत नहीं कर सकता. घर का अकेला कमाने वाला सदस्य हूं. मगर मेरे ग़रीबी के दिन दूर हो चुके हैं. अब मेरी आमदनी पंद्रह हज़ार रुपए महीने है. हमारा गुज़ारा हो जाता है.”
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इमेज कैप्शन, कुलेतिकेरा केरल के कुछ सबसे ग़रीब गांवों में है, जहां विश्वन रहते हैं. हरियाली से घिरे इस गांव की आबादी है क़रीब 200 घर. कम से कम केरल के आर्थिक स्तर के पैमाने के हिसाब से नापें, तो कुलतिकेरा के किसान ग़रीब ही कहे जाएंगे.
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इमेज कैप्शन, भारतीय रिज़र्व बैंक ने तय किया कि एर्नाकुलम में हर परिवार के सदस्यों का बैंक खाता खोला जाए, ताकि सरकारी कर्ज़ और सब्सिडी सीधे किसानों के खाते में पहुंचे. विश्वन ने तब अपनी पत्नी और बेटी के नाम का अकाउंट खुलवा दिया.
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इमेज कैप्शन, विश्वन की रोज़ की दिहाड़ी 600 रुपए होती है, जो बाक़ी राज्यों से ज़्यादा है. वे कहते हैं, “मज़दूरी इतनी है कि 90 फ़ीसदी खेती का काम मैं खुद करता हूं जबकि हाल ही में मेरे दिल के ऑपरेशन हुआ है.”
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इमेज कैप्शन, यूनियन बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी जयप्रकाश कहते हैं, “मैं यह दावा नहीं करता कि सभी ग़रीब इस योजना के तहत आ गए हैं लेकिन इसने पूरे ज़िले के ज़्यादातर लोगों को कवर किया है.”
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इमेज कैप्शन, एर्नाकुलम में अब 50 लाख बैंक खाते हैं. हालांकि ज़िले की आबादी सिर्फ़ 33 लाख है. 2013 में इस ज़िले को भारत का सबसे अधिक बैंक खातों वाला ज़िला घोषित किया गया है.
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इमेज कैप्शन, ज़िले में 900 कमर्शियल बैंक शाखाएं हैं और 200 कोऑपरेटिव बैंक शाखाएं. यहां किसानों को क़र्ज़ आसानी से मिल जाते हैं. इसके बावजूद निजी सेक्टरों के बैंक, माइक्रोफ़ाइनेंस और निजी साहूकार भी यहां सक्रिय हैं.
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इमेज कैप्शन, जयप्रकाश कहते हैं इस योजना का एक और मक़सद था किसानों को साहूकारों के चंगुल से आज़ाद कराना. “इसलिए यह ज़रूरी था कि सभी ग़रीब लोगों के अपने बैंक खाते हों.”
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इमेज कैप्शन, जयप्रकाश के मुताबिक़, ''किसानों को साहूकारों से मुक्ति दिलाने में हमें सफलता नहीं मिली है. हम ये भी दावा नहीं कर सकते कि हम सब ग़रीब तक पहुंच पाने में सफल हुए हैं.''
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इमेज कैप्शन, एर्नाकुलम में बहुत संपन्नता तो शायद आपको न दिखे, मगर तंगहाली और भीषण ग़रीबी भी नहीं देखने को मिलेगी.
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इमेज कैप्शन, कुलेतिकेरा में सिर्फ़ वो किसान बसते हैं, जिनका आसरा धान और वो सब्ज़ियां हैं, जो शहर में बिकने के बाद उनके रोज़मर्रा की ज़िंदगी चलाने लायक पैसा दे जाती हैं. (सभी तस्वीरें- ज़ुबैर अहमद, बीबीसी)