अस्तित्व की लड़ाई लड़ते आदिवासी

ओडिशा के नियामगिरी के आदिवासी अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं. आजादी के 66 सालों में उन्हें मुख्य धारा में लाने की कोशिश तो दूर उनके सामने अस्तित्व का संकट आ गया है. देखिए तस्वीरों में अस्तित्व की लड़ाई लड़ते आदिवासी.

नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, ओडिशा के दक्षिणी पश्चिमी ज़िलों कालाहांडी और रायगढ़ा में, 250 वर्ग किलोमीटर में फैली नियामगिरी पर्वत श्रंखला पर डोंगरिया कोंध नाम के आदिवासी रहते हैं.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, डोंगरिया नियामगिरी पर्वतों को अपना पूर्वज और सबसे पहला राजा मानते हैं और इन्हें नियामगिरी को नियम राजा पेनु कहते हैं.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, नियामगिरी आदिवासियों की भाषा है कुई. इस भाषा में भगवान को पेनु कहते हैं. इन आदिवासियों का मानना है कि अगर नियामगिरी की आज्ञा के बिना जंगल को बर्बाद किया गया तो पेनु का प्रकोप होगा.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, ये आदिवासी ब्रितानी खनन कंपनी वेदांता का विरोध कर रहे हैं, जिसने कालाहांडी के लांजीगढ़ में अल्यूमिनियम तैयार करने का कारखाना लगाया है. कारखाने की क्षमता 10 लाख टन सालाना है.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, ओडिशा खनन निगम के साथ हुए क़रार के मुताबिक़ वेदांता कंपनी नियामगिरी से बॉक्साइट निकालेगी. एक पर्यावरण रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र में क़रीब 73 मिलियन टन बॉक्साइट मौजूद है. मगर आदिवासियों का कहना है कि वो यह नहीं होने देंगे.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, डुंगर यानी पहाड़ों में रहने वाले आदिवासियों का कहना है कि वे जीने के लिए इन पर्वतों पर न सिर्फ़ आश्रित हैं बल्कि इन्हें वो अपना देव और पूर्वज मानते हैं इसलिए इसे खोदे जाने को किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, अपनी ज़िद की क़ीमत डोंगरिया कोंध के ‘मंडोल जानी’ यानी सबसे बड़े सरदार और नियमगिरी सुरक्षा समिति के आदिवासी नेताओं को पुलिस प्रताड़ना और हवालात के रूप में चुकानी पड़ी है.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, आदिवासियों का कहना है कि पिछले 60 सालों में जब उनके दादा और पिता जीवित थे इंदिरा गांधी से लेकर भारतीय जनता पार्टी और नोबीन सरकार आई, लेकिन किसी ने उनका ध्यान नहीं रखा.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, कहा जाता है कि डोंगरिया कोंध हॉर्टिकल्चर यानी बागवानी विज्ञान के क्षेत्र में बहुत उन्नत हैं और इसे दूसरे इलाक़ों में भी अपनाया जाना चाहिए लेकिन बॉक्साइट खनन की योजना को लेकर अब पहाड़ियों पर ही ख़तरा मंडरा रहा है.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, आदिवासी नेताओं का आरोप है कि सुरक्षाबल नक्सलियों की तलाशी के नाम पर लोगों को परेशान करते हैं और हवालात में बंद कर देते हैं. वो महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और उनकी फ़सलें तबाह करने का इल्ज़ाम भी सुरक्षाबलों पर लगाते हैं.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, आदिवासियों के मुताबिक़, “हम नियमगिरी सुरक्षा समिति में है. उनको लगता है कि हमको टार्गेट करने से संघर्ष कमज़ोर पड़ेगा.”
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, कोंध आदिवासियों की तीन जातियां कुतिया, झरनिया और डंगरिया का इस इलाक़े में रहती हैं.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, नियामगिरी पर्वत का जंगल खुद में इस क़दर भरा पूरा है कि डोंगरिया आदिवासियों को कपड़ा, केरोसीन और नमक के अलावा किसी भी दूसरी चीज़ के लिए शायद जंगल से बाहर जाने की ज़रूरत नहीं.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, नियामगिरी के आदिवासियों की पीढ़ियां इसी पर्वत पर ज़िंदगी बसर करते गुज़री हैं. वो किसी भी हालत में विस्थापन नहीं झेलना चाहते.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, हम गोर्था गांव गए, जहां स्कूल होना चाहिए था, पर ‘कोई मास्टर नहीं आया’. वहां जंगल है, पुराने पेड़ हैं, परिंदे हैं, जानवर हैं मगर पीने के पानी का पक्का इंतज़ाम नहीं है. बिजली के खम्बे भी नहीं.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, जंगली घास से तैयार होने वाली झाड़ू, टोकरियां, जंगल के फल और साग-सब्ज़ी आमदनी के छोटे-मोटे ज़रिये हैं. यहां फलों-फूलों और साग-सब्ज़ियों की बहुत उम्दा क़िस्म पैदा होती हैं, लेकिन कोई सही बाज़ार न होने की वजह से आदिवासी इन्हें औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होते हैं.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, 10 मर्दों और 15 औरतों वाला गांव ट्राली या दूसरे डोंगरिया गांवों में भी फूस की दीवारों और टीन की छत वाली झोपड़ियां होती हैं. बिना खिड़कियां वाली. दरवाज़े इतने नीचे और छोटे कि घरों में तक़रीबन बैठकर जाना होता है.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, गांव में किसी नौजवान के पास जो मोबाइल सेट दिखते हैं उनका इस्तेमाल गाने सुनने के लिए किया जाता है. हैंडपंप मुश्किल से ही दिखता है. वरना पीने, खाना पकाने और नहाने के लिए पहाड़ों में बहते नालों और झरनों का सहारा होता है.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई स्कूल की व्यवस्था न होने से वे प्रदेश की उड़िया भाषा भी नहीं जानते. ज़्यादातर लोगों की भाषा कुई है, जिसमें उड़िया के शब्द मिले होते हैं.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, बाडी पिड़िकाका का कहना है “सालों से वोट देने और सरकार बनाने से क्या मिला है हमको, फिर हम इस बात पर विचार करने लगे हैं कि क्यों दें हम वोट?''
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, ‘स्कूल नहीं होने की वजह से हम पढ़ नहीं पाए,’ आदिवासी नेता कहते हैं. “अब कुछ कुछ गांवों में स्कूल तो है, लेकिन मास्टर नहीं आता.”
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, जंगली क्षेत्र होने की वजह से माओवादी इलाक़े में मौजूद हैं और इसी कारण से सुरक्षाबलों की मौजूदगी और गश्त इलाक़े में बनी रहती है.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, नियामगिरी न सिर्फ झरनों और पहाड़ी नालों से पटा है बल्कि क्षेत्र की दो बड़ी नदियों वंसधारा और नागावली का भी यह स्रोत है. ऊपर से लगभग समतल इन पहाड़ियों में अनानास, आम, कटहल, जामुन, केले, ख़ास क़िस्म के गन्ने, मसाले, मशरूम, दलहन, बाजरे और तिलहन जैसे सुरजमुखी की खेती होती है.
नियामगिरी, ओडिशा
इमेज कैप्शन, ग्राम सभा समिति ने सर्वसम्मति से वेदांता की खनन परियोजना को नामंज़ूर कर दिया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद खनन के काम पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. वेदांता के कारख़ाने का काम बाहर से लाए गए कच्चे माल से चल रहा है.