क़तार का आख़िरी गांव

मुक्केबाज़ी में विश्व चैंपियन मेरी कॉम का गांव आज भी उसी हाल में है जब यहां से मेरी कॉम ने अपने सपनों को पंख देने शुरू किए थे. यहां के लोगों को आस है कि शायद कभी उनके दिन भी बहुरेंगे.

मणिपुर की राजधानी इम्फ़ाल से क़रीब 60 किलोमीटर दूर कंगाथाई कबायली कॉम जाति के 32 परिवारों का एक छोटा सा गांव है, जहाँ बॉक्सिंग चैंपियन मेरी कॉम पली-बढ़ी हैं.
इमेज कैप्शन, मणिपुर की राजधानी इम्फ़ाल से क़रीब 60 किलोमीटर दूर कंगाथाई कबायली कॉम जाति के 32 परिवारों का एक छोटा सा गांव है, जहाँ बॉक्सिंग चैंपियन मेरी कॉम पली-बढ़ी हैं.
पिछले एक दशक में जब मेरी कॉम अपने बेहतरीन खेल की वजह से सुर्खियों में आने लगीं, उसी दौर में उनकी हमउम्र लड़कियां रोज़गार के बेहतर अवसर पाने के लिए मेहनत कर रही थीं.
इमेज कैप्शन, पिछले एक दशक में जब मेरी कॉम अपने बेहतरीन खेल की वजह से सुर्खियों में आने लगीं, उसी दौर में उनकी हमउम्र लड़कियां रोज़गार के बेहतर अवसर पाने के लिए मेहनत कर रही थीं.
इस गांव की कुछ लड़कियां नर्स की ट्रेनिंग लेकर दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों में नौकरी कर रही हैं.
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मणिपुर में एक चुनावी रैली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि मेरी जैसी महिलाओं को संसद में होना चाहिए. इस बार चुनाव आयोग ने मेरी को अपना दूत बनाया है और प्रियंका चोपड़ा मेरी के जीवन पर बन रही फ़िल्म में उनकी भूमिका निभा रही हैं.
इमेज कैप्शन, मणिपुर में एक चुनावी रैली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि मेरी जैसी महिलाओं को संसद में होना चाहिए. इस बार चुनाव आयोग ने मेरी को अपना दूत बनाया है और प्रियंका चोपड़ा मेरी के जीवन पर बन रही फ़िल्म में उनकी भूमिका निभा रही हैं.
मेरी कॉम ख़ुद यह गांव छोड़ चुकी हैं. उनके पिता और भाई यहां रहते हैं, लेकिन वो भी कुछ महीनों में इम्फ़ाल चले जाएंगे.
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मेरी के भाई फांग्ते खुप्रे कॉम का कहना है कि वह शहर में नौकरी करना चाहते हैं और वहां रहकर अपने बेटे के लिए बेहतर ज़िंदगी बनाना चाहते हैं.
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30 साल की अबी कॉम अरुणाचल प्रदेश के एक स्कूल में टीचर हैं. वे अपने गांव से पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश तक बस में जाती हैं, जिसमें उन्हें पूरा एक दिन और एक रात का समय लगता है.
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कंगाथाई गांव में प्राइमरी स्कूल के नाम पर एक हॉल में कुछ बेंच रखी हैं और एक बोर्ड रखा है.
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यहां के कई बच्चे अब इम्फ़ाल जैसे शहरों में पढ़ाई करके दूसरे राज्यों में टीचर बन गए हैं.
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वर्ल्ड चैंपियन बॉक्सर मेरी कॉम सचमुच चुनौतियों से जूझकर जीतने वाली प्रतिभा हैं. क़रीब 20 साल पहले मेरी के परिवार की माली हालत इतनी ख़राब थी कि वो इम्फ़ाल के अपने स्कूल तक जाने के लिए 60 किलोमीटर का सफ़र साइकिल से तय करती थीं.
इमेज कैप्शन, वर्ल्ड चैंपियन बॉक्सर मेरी कॉम सचमुच चुनौतियों से जूझकर जीतने वाली प्रतिभा हैं. क़रीब 20 साल पहले मेरी के परिवार की माली हालत इतनी ख़राब थी कि वो इम्फ़ाल के अपने स्कूल तक जाने के लिए 60 किलोमीटर का सफ़र साइकिल से तय करती थीं.
कंगाथाई पहुंचने का रास्ता काफ़ी ख़राब है. इस रास्ते पर निकलने के लिए आपको हिचकोले खाते हुए ही जाना पड़ेगा.
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हालांकि कंगाथाई में लोगों के घर पक्के हैं. दिन में बिजली तीन से चार घंटे के लिए ही आती है पर सभी घरों में टीवी है और कुछ में टाटा स्काय की डिश भी लगी है.
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गांववालों के पास राशन कार्ड हैं, लेकिन पास में कोई राशन की दुकान नहीं है. लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार बहुत ज़्यादा है और मनरेगा जैसी योजनाओं में रोज़गार भी नहीं मिलता.
इमेज कैप्शन, गांववालों के पास राशन कार्ड हैं, लेकिन पास में कोई राशन की दुकान नहीं है. लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार बहुत ज़्यादा है और मनरेगा जैसी योजनाओं में रोज़गार भी नहीं मिलता.
गांव के कई लोग सरकारी या प्राइवेट नौकरी की तलाश में हैं. मेरी के भाई खुप्रे का तरह, कई सेना में भर्ती होना चाहते हैं. इस सबके बावजूद उन्हें आस है कि एक दिन उनके गांव का भी विकास होगा.
इमेज कैप्शन, गांव के कई लोग सरकारी या प्राइवेट नौकरी की तलाश में हैं. मेरी के भाई खुप्रे का तरह, कई सेना में भर्ती होना चाहते हैं. इस सबके बावजूद उन्हें आस है कि एक दिन उनके गांव का भी विकास होगा.
गांव वाले बताते हैं कि चुनाव के समय उनके गांव में राजनेता नहीं, बल्कि उनके एजेंट आते हैं और इस चुनाव में अब तक वो भी वोट मांगने नहीं आए हैं.
इमेज कैप्शन, गांव वाले बताते हैं कि चुनाव के समय उनके गांव में राजनेता नहीं, बल्कि उनके एजेंट आते हैं और इस चुनाव में अब तक वो भी वोट मांगने नहीं आए हैं.
गांव के लोगों का कहना था कि वे अपनी ज़िंदगी बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं, मगर सड़क, अस्पताल, स्कूल, बिजली वो नहीं ला सकते. यह काम तो सरकार को करना चाहिए. (सभी तस्वीरें- दिव्या आर्य)
इमेज कैप्शन, गांव के लोगों का कहना था कि वे अपनी ज़िंदगी बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं, मगर सड़क, अस्पताल, स्कूल, बिजली वो नहीं ला सकते. यह काम तो सरकार को करना चाहिए. (सभी तस्वीरें- दिव्या आर्य)