कपास जिससे ज़ख्म ढँकने वाले फ़ाहे नहीं बनते

विदर्भ में हर साल हज़ारों किसान आत्महत्या करते हैं लेकिन वह हर बार चुनावी मुद्दा नहीं बनता. हज़ारों विधवाओं की आवाज़ दिल्ली तक नहीं पहुंचती, क्योंकि वे क़तार के आख़िरी लोगों में हैं.

इंदिरा, विदर्भ की विधवा, क़तार का आख़िरी
इमेज कैप्शन, नागपुर से 135 किलोमीटर दूर दाहेगाँव में नज़र आती है ग़रीबी की वो तस्वीर जिसमें बरसों की लाचारी, बदहाली और नाउम्मीदी के रंग मिले हुए हैं.
इंदिरा, विदर्भ की विधवा, क़तार का आख़िरी
इमेज कैप्शन, दाहेगाँव में रहने वाली इंदिरा ग़रीबी की गिरफ़्त से कभी नहीं छूट सकीं. इंदिरा का जन्म ग़रीबी में हुआ. इसी ग़रीबी में उनकी शादी हुई और अब इसी ग़रीबी में उन्हें जीना है, पति के सहारे के बिना.
इंदिरा, विदर्भ की विधवा, क़तार का आख़िरी
इमेज कैप्शन, अब से आठ साल पहले, ग़रीबी से मुक्ति का उपाय ढूँढने में नाकाम इंदिरा के पति ने आत्महत्या कर ली.
इंदिरा, विदर्भ की विधवा, क़तार का आख़िरी
इमेज कैप्शन, इंदिरा को तकनीकी कारणों से मुआवज़ा नहीं मिला. वो कहती हैं, “मैंने सरकारी दफ्तरों के कई चक्कर लगाए लेकिन एक पैसा भी नहीं मिला.”
विदर्भ की विधवा, क़तार का आख़िरी
इमेज कैप्शन, दाहेगाँव में दूर-दूर तक पक्के घर नहीं दिखते. घरों के बाहर महिलाएँ और बच्चे फटे-मैले कपड़ों में ही नज़र आते हैं.
विदर्भ की विधवा, क़तार का आख़िरी
इमेज कैप्शन, विदर्भ में दस लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं, पिछले दस-पंद्रह वर्षों से इन सीटों पर भाजपा, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और काँग्रेस को जीत मिलती रहती है.
विदर्भ की विधवा, क़तार का आख़िरी
इमेज कैप्शन, लेकिन किसानों की समस्या पर ज़ोरदार आवाज़ संसद में कभी सुनने को नहीं मिलती. इस बार यहाँ चुनावी मुद्दा है विदर्भ के लिए एक अलग राज्य की माँग.
विदर्भ की विधवा, क़तार का आख़िरी
इमेज कैप्शन, सरकारी नियमों के मुताबिक़ किसान की मौत पर परिवार को मुआवज़ा तभी मिलता है जब ज़मीन का पट्टा मृत व्यक्ति के नाम पर हो, आत्महत्या के हज़ारों मामले ऐसे हैं जिनमें किसान ख़ानदानी ज़मीन पर खेती कर रहे थे लेकिन ज़मीन उनके पिता या अन्य रिश्तेदार के नाम पर थी.
विदर्भ की विधवा, क़तार का आख़िरी
इमेज कैप्शन, राज्य और केंद्र सरकार ने विदर्भ और देश के दूसरे हिस्सों में कर्ज में डूबे हुए किसानों के लिए कई पैकेज दिए हैं लेकिन दाहेगाँव जैसे पिछड़े इलाकों में किसानों की निरक्षरता के कारण वो इसका फायदा नहीं उठा पाते.
विदर्भ की विधवा, क़तार का आख़िरी
इमेज कैप्शन, सरकारी पैकेज से बैंक के कर्ज़े तो माफ़ हो सकते हैं लेकिन साहूकारों से लिए गए कर्ज़ से जान छुड़ाना मुश्किल है.
विदर्भ की विधवा, क़तार का आख़िरी
इमेज कैप्शन, विदर्भ के दाहेगाँव में हर तरफ़ तंगहाली और बदहाली ही नज़र आती है.
विदर्भ की विधवा, क़तार का आख़िरी
इमेज कैप्शन, अभी तक कोई दीर्घकालिक सरकारी योजना नहीं है, लोगों में इन किसानों के लिए कोई हमदर्दी नहीं है.
विदर्भ की विधवा, क़तार का आख़िरी
इमेज कैप्शन, दिल्ली में उनके लिए कोई बोलने वाला नहीं है. चुनाव में उन्हें कोई मुद्दा बनाने वाला नहीं है.
विदर्भ की विधवा, क़तार का आख़िरी
इमेज कैप्शन, विदर्भ में विधवाओं की संख्या साढ़े दस हज़ार से भी अधिक है. सभी तस्वीरें बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद की हैं.