जोधपुर में सज गया जिप्सी मेला

जोधपुर में फ़्लेमेंको-जिप्सी महोत्सव शुरू हो चुका है. पहले दिन शहर का मेहरानगढ़ क़िला देसी-विदेशी कलाकारों के सुर-ताल से गूंज उठा. पेश है तस्वीरें.

फ़्लेमेंको-जिप्मी महोत्सव
इमेज कैप्शन, जोधपुर का मेहरानगढ़ क़िला, ज़मीनी सतह से चार हज़ार फ़ीट की ऊंचाई पर मौजूद है. जोधपुर के पहले राजा राव जोधाणा ने साल 1459 में इसकी नींव डाली और अगले दस सालों में ये बन कर तैयार हुआ. आज इस क़िले का इस्तेमाल एक संग्राहलय और पर्यटन स्थल के रूप में किया जा रहा है. इसी क़िले की बारहवीं मंज़िल पर आयोजित किया गया है जोधपुर फ्लेमेंको जिप्सी फेस्टिवल जो 13 मार्च से शुरू होकर 15 मार्च चलेगा. (सभी तस्वीरें: बीबीसी संवाददाता सुशांत एस मोहन)
फ़्लेमेंको-जिप्मी महोत्सव
इमेज कैप्शन, मेहरानगढ़ क़िले की सबसे ऊंची दीवार से जोधपुर शहर का पूरा नज़ारा मिलता है. फ्लेमेंको महोत्सव के लिए शहर को रोशनी से सजाया गया है. आमतौर पर शाम नौ-दस बजे तक अंधेरे में डूब जाने वाले इस शहर में इस दौरान रात 12 बजे भी जगमगाहट दिखी.
फ़्लेमेंको-जिप्मी महोत्सव
इमेज कैप्शन, इस महोत्सव की शुरुआत 13 मार्च की शाम 7.30 बजे से हुई. ये मंच मेहरानगढ़ क़िले कि बारहवी मंज़िल पर मौजूद जनानी ड्योढ़ी पर सजाया गया है. जनानी ड्योढ़ी एक समय में जोधपुर की महारानी का निवास स्थान था लेकिन राज परिवार के चले जाने के बाद इसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए खोल दिया गया है. यहाँ पहुँचने के लिए 45 डिग्री की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है लेकिन संगीत के दीवानों को इससे कोई शिकायत नहीं है.
फ़्लेमेंको-जिप्मी महोत्सव
इमेज कैप्शन, स्पेनिश नर्तकी तमार गोंज़ालेज़ ने अपने फ्लेमेंको नृत्य से समारोह की शुरुआत की. फ्लेमेंको नृत्य, स्पेन का एक नृत्य है जो मुख्य रूप से वहां के जिप्सियों में मशहूर है. फ्लेमेंको नृत्य शैली में कई तत्व भारतीय शास्त्रीय नृत्य कत्थक से लिए गए हैं.
फ़्लेमेंको-जिप्मी महोत्सव
इमेज कैप्शन, फ्लेमेंको नृत्य और काल बेलिया नृत्य का संगम. राजस्थानी काल बेलिया नर्तकी आशा सपेरा और फ्लेमेंको डांसर तमार ने जब राजस्थानी लोकगीतों पर थिरकना शुरू किया तो देखने वाले दंग रह गए. इस परफ़ॉरमेंस में ख़ास बात ये थी कि तमार ने राजस्थानी और आशा ने फ्लेमेंको नृत्य की भाव भंगिमाएं दी.
फ़्लेमेंको-जिप्मी महोत्सव
इमेज कैप्शन, खोसे कारमोना स्पेनिश संगीत की सनसनी हैं और ये भारत में उनका पहला दौरा है. खोसे सिर्फ स्पेनिश भाषा ही बोलते हैं लेकिन जब उन्होंने राजस्थानी भाषा में 'म्हारो रंगीला राजस्थान' गाया तो तालियों से पूरा मेहरानगढ़ क़िला गूँज उठा.
फ़्लेमेंको-जिप्मी महोत्सव
इमेज कैप्शन, स्पेन से आये संगीतकारों में शामिल थे पाब्लो डोमिंगुएज और ऑगस्टिन कार्बोनेल जो अपने स्पेनिश गीत 'बोला' के लिए जाने जाते हैं. कार्बोनेल के गिटार की धुनों पर पाब्लो ने 'काजो' से कई धुनें निकाली हैं.' काजो' एक लकड़ी का बक्सा होता है और इस पर बैठ कर ही इसे बजाया जाता है. इन दोनों की जुगलबंदी ने सुनने वालों को रोमांचित कर दिया था.
फ़्लेमेंको-जिप्मी महोत्सव
इमेज कैप्शन, शुक्रवार देर शाम स्पेनिश फ्लेमेंको संगीत के सबसे पुराने कलाकार पेपे बिचुएला मेहरानगढ़ में परफॉर्म करेंगे. पेपे 70 साल के हैं और शुरुआती फ्लेमेंको संगीतकारों में से एक माने जाते हैं. पेपे किसी तरह का फ्यूज़न नहीं करते हैं और विशुद्ध फ्लेमेंको संगीत के समर्थक हैं.
फ़्लेमेंको-जिप्मी महोत्सव
इमेज कैप्शन, अपनी पर्फ़ॉरमेंस के बाद स्पेनिश फ्लेमेंको कलाकार तमार गोंज़ालेज़ और राजस्थानी लोक नर्तकी आशा सपेरा ने बीबीसी से ख़ास मुलाक़ात की और अपने अनुभव बांटे.