जिस्मफ़रोश मर्दों की दुनिया

मर्दों के भी ख़रीदार होते हैं और ये पेशा महज़ औरतों तक ही सीमित नहीं रह गया है. फिलिप लोर्का डिकोर्सिया की तस्वीरें कुछ ऐसी ही क़िस्सागोई करती हैं.

हेपवर्थ वेकफील्ड में फिलिप लोर्का डिकोर्सिया. फोटोः बॉब कोलियर
इमेज कैप्शन, न्यूयॉर्क के प्रभावशाली आर्ट फोटोग्राफर फिलिप लोर्का डिकोर्सिया को उनकी ख़ास शैली के लिए जाना जाता है. कहा जाता है कि उनकी तस्वीरें काल्पनिकता और यथार्थ के बीच की पतली सी विभाजन रेखा को पाट देती हैं. उनके तस्वीरों की एक प्रदर्शनी इन दिनों यॉर्कशायर के वेकफील्ड में हेपवर्थ गैलरी में चल रही है. फोटो प्रदर्शनी के लिए चुनी गईं 120 तस्वीरों में लोर्का डिकोर्सिया के 40 साल के करियर की ख़ास झलकियाँ देखी जा सकती हैं. अतीत में झाँकती ये तस्वीरें अपनी तरह की पहली कोशिश हैं. फोटोः बॉब कोलियर. फोटो साभारः आर्टिस्ट और दी हेपवर्थ वेकफील्ड.
फिलिप-लोर्का डिकोर्सिया, फोटो शीर्षकः क्रिस, 28 साल, लॉस एंजिलीस, कैलिफोर्निया, 30 डॉलर, 1990-92. सभी फोटो साभारः आर्टिस्ट, स्प्रथ मेगर्स, बर्निल/लंदन और डेविड ज्विर्नर, न्यूयॉर्क/लंदन
इमेज कैप्शन, डिकोर्सिया को ख़ासी शोहरत उस वक्त मिली जब 'वेश्या' नाम से उनकी सिरीज प्रकाशित हुई. इस सिरीज में लॉस एंजिलिस के पुरुष वेश्याओं की ज़िंदगी में झाँकने की कोशिश की गई थी. फिलिप ने इन पुरुष वेश्याओं को उनकी क़ीमत भी अदा की जो वे अमूमन अपनी सेवाओं के लिए ग्राहकों से वसूलते हैं. हसलर सिरीज पर डिकोर्सिया की पहली एकल फोटो प्रदर्शनी साल 1993 में न्यूयॉर्क के म्यूज़ियम ऑफ़ मॉडर्न आर्ट में आयोजित की गई. फोटो शीर्षकः क्रिस, 28 साल, लॉस एंजिलीस, कैलिफोर्निया, 30 डॉलर, 1990-92. सभी फोटो साभारः आर्टिस्ट, स्प्रथ मेगर्स, बर्लिन/लंदन और डेविड ज्विर्नर, न्यूयॉर्क/लंदन
फिलिप लोर्का डिकोर्सिया, फोटो शीर्षकः 'इन हिज ट्वेंटीज', लॉस एंजिलीस, कैलिफोर्निया, 30 डॉलर, 1990-92
इमेज कैप्शन, फोटो शीर्षकः 'इन हिज ट्वेंटीज', लॉस एंजिलिस, कैलिफोर्निया, 30 डॉलर, 1990-92, फिलिप अपनी तस्वीरों की शूट से पहले पूरी तैयारी करते हैं. फिलिप कहते हैं, "मैं उन गलियों में गया जहाँ वे खुद को बेचा करते थे. मैंने उन्हें वो रकम देने की पेशकश की जो वे अपने पेशे में एक ग्राहक से कम से कम कमा लेते थे. मुझे लगता है कि उनमें से शायद ही किसी को मेरी पेशकश पर यकीन हुआ होगा लेकिन इतना तो तय है कि वे वेश्या थे."
फिलिप लोर्का डिकोर्सिया, फोटो शीर्षकः राल्फ स्मिथ, 21 साल, एफटी लॉडेर्डेल फ्लोरि़डा, 25, 1990-92.
इमेज कैप्शन, फोटो शीर्षकः राल्फ स्मिथ, 21 साल, एफटी लॉडेर्डेल फ्लोरि़डा, 25, 1990-92. डिकोर्सिया ने अपनी ये फोटो सिरीज उस वक्त शुरू की जब उनके भाई की एड्स से मृत्यु हो गई थी. वे कहते हैं, "ये फोटो सिरीज़ उस माहौल में बनाई गई थी जब एड्स और राजनीतिक दमन का दौर था और राष्ट्रपति रीगन अपने चरम पर थे. इसलिए एक ही वक़्त पर जारी सांस्कृतिक और राजनीतिक लड़ाई का एक प्रतिक्रियात्मक पहलू भी था. डिकोर्सिया की एक और एकल प्रदर्शनी लॉस एंजिलिस के काउंटी म्यूज़ियम ऑफ आर्ट और बोस्टन के इंस्टीट्यूट ऑफ़ कंटेम्प्रेरी आर्ट में भी आयोजित की जा चुकी है.
फिलिप लोर्का डिकोर्सिया, फोटो शीर्षकः फोटो शीर्षकः हार्टफोर्ड. 1979. साभारः आर्टिस्ट, स्प्रथ मेगर्स, बर्लिन/लंदन और डेविड ज़्विर्नर, न्यूयॉर्क/लंदन
इमेज कैप्शन, फोटो शीर्षकः हार्टफोर्ड. ये तस्वीर फिलिप के अपने ही शहर कनेक्टीकट में 1979 में ली गई थी. फिलिप कहते हैं, "इस आदमी का नाम रॉबिन है और ये उनका ही घर है. मैं खुशनसीब था कि जब उनकी सिगरेट का सिरा सुलग कर लाल हो रहा था, तभी मैंने कैमरा क्लिक किया. ये मेरी फोटोग्राफी का हिस्सा था." किसी तस्वीर के बारे में ये वो बारीकियां थीं जिसे पूरी तरह से सोच समझकर बताया गया और ये उम्मीद की गई कि उस पर लोग ध्यान देंगे. फिलिप कहते हैं, "मेरी तस्वीरों पर अगर आप ध्यान नहीं देंगे तो ये शायद पसंद भी न आएँ. मेरी तस्वीरों को लोग अक्सर अवसाद के प्रतीक के तौर पर देखते हैं. वो शायद इस फोटो के मामले में भी कुछ हद तक सही हैं."
फिलिप लोर्का डिकोर्सिया, 'न्यूयॉर्क सिटी' (ब्रूस और रॉनी, 1982) साभारः आर्टिस्ट, स्प्रथ मेगर्स, बर्लिन/लंदन और डेविड ज़्विर्नर, न्यूयॉर्क/लंदन
इमेज कैप्शन, 'हार्टफोर्ड' की तरह इस तस्वीर का भी नाम 'न्यूयॉर्क सिटी' (ब्रूस और रॉनी, 1982) रखा गया. ये तस्वीर 'अ स्टोरीबुक लाइफ़' नाम की फोटो सिरीज का हिस्सा है. फिलिप की कई अन्य तस्वीरों की तरह ये भी पूरी तरह मंचित की गई थी. वे कहते हैं, "ब्रूस कोई लेखक नहीं हैं और रॉनी सो रहा है." फिलिप की तस्वीरें कोई डॉक्यूमेंट्री या किसी जर्नलिज़्म का भी हिस्सा नहीं है. वे कहते हैं, "फर्जी होने का मतलब इस बात की ओर इशारा भी होता है कि आख़िर में सब कुछ किसी झूठी कहानी का हिस्सा होता है."
फिलिप लोर्का डिकोर्सिया, डिब्रूस, 1999. साभारः आर्टिस्ट, स्प्रथ मेगर्स, बर्लिन/लंदन और डेविड ज़्विर्नर, न्यूयॉर्क/लंदन
इमेज कैप्शन, इस तस्वीर में डिकोर्सिया के बेटे ब्रूनो हैं. न्यूयॉर्क के किसी लोकेशन पर ली गई साल 1999 की इस तस्वीर का नाम डिब्रूस है. ये तस्वीर भी 'अ स्टोरीबुक लाइफ़' फोटो सिरीज का हिस्सा है जिसमें 74 तस्वीरें थीं. ये तस्वीरें किसी कहानी के एकतरफे हिस्से को बयां करती हैं जिसमें पहली और आखिरी तस्वीर फिलिप के ही पिता की हैं.
फिलिप लोर्का डिकोर्सिया, तोक्यो, 1988, साभारः आर्टिस्ट, स्प्रथ मेगर्स, बर्लिन/लंदन और डेविड ज़्विर्नर, न्यूयॉर्क/लंदन
इमेज कैप्शन, फिलिप डिकोर्सिया की कुछ तस्वीरें पूरी तरह से गढ़ी गई हैं जबकि साल 1988 की तोक्यो के लिए उन्होंने मनमाफिक शॉट्स की खातिर अपना कैमरा और लाइट्स एक सार्वजनिक जगह पर बेहद ही सावधानी के साथ लगा दिया था. वे कहते हैं, "उन सभी में एक तरह की निश्चिंतता का भाव दिखाई देता है और उनमें से कोई न कोई किसी खास बात को लेकर प्रतिक्रिया जता रहा है." फैशन फोटोग्राफी और विज्ञापन जगत के साथ-साथ साथी कलाकारों पर भी डिकोर्सिया का असर देखा जा सकता है.
फिलिप लोर्का डिकोर्सिया, हना, 2004, साभारः आर्टिस्ट, स्प्रथ मेगर्स, बर्लिन/लंदन और डेविड ज़्विर्नर, न्यूयॉर्क/लंदन
इमेज कैप्शन, इस तस्वीर के बारे में फिलिप डिकोर्सिया बताते हैं कि 11 सितंबर 2001 की घटना से प्रेरित होकर साल 2004 में पोल डांसर्स की ये फोटो सिरीज बनाई गई थी. फोटो में दिख रहा डांसर गिर रहा है और ये उनकी याद दिलाता है जो ट्विन टॉवर से उस वक्त गिर रहे होंगे. ये तस्वीर एक तरह की टिप्पणी भी है कि 11 सितंबर की घटना के बाद अमरीका का किस तरह से पतन हुआ. वे कहते हैं, "11 सितंबर के बाद अमरीका में हर चीज पर अजीब तरीके से ध्यान दिया जाने लगा. धार्मिक किताबों में यौन और मृत्यु की संकल्पनाएँ एक दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं. मुझे ऐसा लगा कि अमरीका में 11 सितंबर के बाद जो कुछ भी हुआ, इसी की वजह से हुआ. झूठे वादों पर दो लड़ाइयां लड़ी गईं और अब तक के सबसे ख़राब राष्ट्रपति का दोबारा निर्वाचन हुआ."
फिलिप लोर्का डिकोर्सिया, लिन एंड शिर्ल् 2008, साभारः आर्टिस्ट, स्प्रथ मेगर्स, बर्लिन/लंदन और डेविड ज़्विर्नर, न्यूयॉर्क/लंदन
इमेज कैप्शन, फिलिप डिकोर्सिया कहते हैं कि उन्हें कंप्यूटर की तकनीकें ज्यादा नहीं आतीं. वे फोटोशॉप का इस्तेमाल करना भी नहीं जानते. डिजिटल फोटोग्राफी के प्रचार प्रसार के कारण लोग ये समझने लगे हैं कि ये बच्चों का खेल हो गया है. वे कहते हैं, "ये बहुत खराब होने जा रहा है." ये फोटो प्रदर्शनी एक जून तक चलती रहेगी. फोटो शीर्षकः लिन एंड शिर्ले, 2008