कपड़े पहनने का ख़ास त्योहार

कॉन्गो में हर साल एक ख़ास मौक़े पर कई लोग एक से बढ़कर एक भड़कीले कपड़े पहनते हैं. देखिए, किसने क्या जलवा दिखाया.

दी सैपे मूवमेंट, कॉन्गो
इमेज कैप्शन, कॉन्गो में वर्ष 1960 में एक ख़ास आंदोलन शुरू हुआ. इस आंदोलन को 'नफ़ीस लोगों को बढ़ावा देने वाला समाज' या सापियोर भी कहते हैं.
दी सैपे मूवमेंट, कॉन्गो
इमेज कैप्शन, इस आंदोलन का आरंभ किया था स्टर्वोस नियारकोस न्गाशिए ने. उनके प्रशंसक हर साल उनकी याद में इसे मनाते हैं.
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इमेज कैप्शन, म्वेतू (बांए) और मोज़ार अपने नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए किन्शासा के गोम्बे क़ब्रिस्तान आए हैं.
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इमेज कैप्शन, न्गाशिए ने 'कितेन्दी' धर्म की भी स्थापना की थी. स्थानीय भाषा में कितेन्दी का अर्थ होता है कपड़े पहनना.
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इमेज कैप्शन, इस आंदोलन को 'नफ़ीस लोगों को बढ़ावा देने वाला समाज' या सापियोर भी कहते हैं.
दी सैपे मूवमेंट, कॉन्गो
इमेज कैप्शन, न्गाशिए ला सैपे मूवमेंट के संस्थापक थे. न्गाशिए की मृत्यु वर्ष 1995 में हुई थी.
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इमेज कैप्शन, इस आदमी ने चार मीटर लंबी आस्तीन वाली शर्ट पहन रखी है.
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इमेज कैप्शन, इस आंदोलन में आने वाले एक से बढ़कर एक भड़कीले कपड़े पहनकर आते हैं.
दी सैपे मूवमेंट, कॉन्गो
इमेज कैप्शन, यह सज्जन अपने ख़ास सूट में अपने नेता की बरसी पर पहुँचे हैं.
दी सैपे मूवमेंट, कॉन्गो
इमेज कैप्शन, तस्वीर में नज़र आ रहे जनाब सैपियर डिज़ाइनर लेबल वाले कपड़े पहनते हैं. वह विचित्र-विचित्र तरह के साजो-सामान का भी प्रदर्शन करते हैं.
दी सैपे मूवमेंट, कॉन्गो
इमेज कैप्शन, स्टर्वोस नियारकोस न्गाशिए की कब्र पर एकत्रित सैपियर.