‘मौत की घाटी’ में बर्फ़ के बंदर

जापान के उत्तर में एक ऐसी जगह है, जहां चारों तरफ़ बिछी बर्फ़ के बीच सिर्फ़ बंदरों का साम्राज्य है. देखिए, इन अजूबे बंदरों को तस्वीरों में.

बर्फ़ के बंदर, जापान, जापानी मकाक़
इमेज कैप्शन, ये हैं जापानी मकाक़ बंदर, जिन्हें बाक़ी दुनिया बर्फ़ के बंदरों के नाम से जानती है. जापान की मौत की घाटी यानी जिगोकुदानी मंकी पार्क में ये इस वक़्त खुले आसमान के नीचे गर्म पानी के झरने में आराम फ़रमा रहे हैं. गिरती बर्फ़ के फ़ाहों के बीच इन्हें इस झरने में आराम करना बेहद पसंद है.
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इमेज कैप्शन, मंकी पार्क जापान के नागानो प्रिफ़ैक्चर के यामानूची शहर का हिस्सा है, और तक़रीबन 160 मकाक़ बंदरों की आरामगाह है. जो भी पर्यटक जापान आते हैं और इस इलाक़े का रुख करते हैं, वो इन बंदरों की एक झलक पाने को बेताब रहते हैं.
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इमेज कैप्शन, बेहद सीधी चट्टानों और झरने से उठने वाली भाप की वजह से जापान के पुराने लोग इस घाटी को मौत की घाटी या नर्क घाटी के नाम से पुकारते थे. मगर सदियों पहले बंदरों ने इसे अपना आशियाना बना लिया क्योंकि यहां का मौसम उनके लिए अनुकूल था.
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इमेज कैप्शन, जापानी मकाक़ ओल्ड वर्ल्ड मंकी यानी बंदरों की उस प्रजाति का हिस्सा हैं जो अब सिर्फ़ अफ़्रीका और एशिया तक महदूद होकर रह गई है. जापान के जिस इलाक़े में ये बंदर बसते हैं, वहां साल के चार महीने तक बर्फ़ जमी रहती है.
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इमेज कैप्शन, जापानी इन्हें निहोनसारू कहते हैं. जापानी मकाक़ वहां इतना लोकप्रिय है कि अगर जापानी इन्हें सिर्फ़ सारू भी कहते हैं तो लोग समझ जाते हैं कि बात जापानी मकाक़ बंदर की हो रही है.
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इमेज कैप्शन, जापानी मकाक़ को जापानी धर्म, लोककला और साहित्य के साथ ही कहावतों और मुहावरों में ख़ूब जगह मिली है. शिंतो धर्म की मान्यता है कि राइजू नाम के मिथकीय जानवर अक्सर बंदरों में तब्दील हो जाया करते थे और उनके साथ रोशनी का देवता राइजिन रहा करता था.
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इमेज कैप्शन, जापानी मकाक़ को कई परीकथाओं में भी याद किया जाता है. मसलन मोमोतारो की परीकथा में एक जापानी मकाक़ और केकड़े की कहानी सुनाई जाती है. चीनी राशि चिह्नों में भी बंदर को स्थान मिला है जिसे जापान में सदियों से इस्तेमाल किया जाता रहा है. इस बंदर को इदो काल के चित्रों में एक साल विशेष के रूपक के बतौर भी दिखाया गया है. इदो काल के दौरान किमोनो (खास किस्म का वस्त्र) और तंबाकू के पाउच भी मकाक़ की आकृति के मुताबिक़ बनाए जाते थे.
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इमेज कैप्शन, 19वीं सदी के कलाकार और सामुराई वातनाबे कज़ान ने मकाक़ की एक पेंटिंग बनाई थी. सत्ता में आने से पहले मशहूर सामुराई तोयोतोमी हिदेयोशी की तुलना एक बंदर से की जाती थी और उन्हें उनके मास्टर ओदा नोबुनागा ने कोज़ारू (छोटा बंदर) का उपनाम दिया था. बाद में हिदेयोशी के विरोधियों ने उनका मज़ाक उड़ाने के लिए इस शब्द का प्रयोग करना शुरू कर दिया था.