फिर खेला जाएगा सांड को क़ाबू करने का खेल

केंद्र सरकार ने क़रीब दो साल बाद तमिलनाडु में सांड को क़ाबू करने के परंपरागत खेल जल्लीकट्टू से रोक हटा ली है.

बुल टैमिंग फेस्टिवल, सांडों को काबू करने का खेल, पोंगल, जल्लीकट्टू, मदुरई, दक्षिण भारत
इमेज कैप्शन, पोंगल महोत्सव की परंपरा में गाँव के लोग 'जल्लीकट्टू' यानि सांडों को काबू करने के खेल में शामिल होते हैं. इस खेल की शुरुआत में एक सांड को घेरे के भीतर मौजूद लोगों के बीच छोड़ा जाता है. केंद्र सरकार ने जल्लीकट्टू से पाबंदी हटा ली है. सुप्रीम कोर्ट ने मई 2014 में केंद्र सरकार के तब के नोटिफ़िकेशन को सही ठहराते हुए जल्लीकट्टू पर रोक लगा दी थी.
बुल टैमिंग फेस्टिवल, सांडों को काबू करने का खेल, पोंगल, जल्लीकट्टू, मदुरई, दक्षिण भारत
इमेज कैप्शन, इस त्योहार के दौरान गाँव के सारे लोग किसी ख़ास स्थान पर एकत्रित होते हैं. दर्शक घेरे के बाहर और प्रतिभागी घेरे के भीतर सांडों को काबू में करने के लिए जोर-आजमाइश करते हैं. तमिलनाडु में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इसे देखते इस खेल से रोक हटाने का फ़ैसला अहम माना जा रहा है.
बुल टैमिंग फेस्टिवल, सांडों को काबू करने का खेल, पोंगल, जल्लीकट्टू, मदुरई, दक्षिण भारत
इमेज कैप्शन, चेन्नई से पाँच सौ किलोमीटर दूर मदुरई शहर के बाहर स्थित गाँव में सांडो को काबू करने के खेल को जीवंत बनाते प्रतिभागियों और खेल का आनंद लेते दर्शकों को देखा जा सकता है. खेल के दौरान पुलिस बल भी मौजूद होता है ताकि किसी अनचाही स्थिति से निपटा सके. पर्यावरण और वन मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी करते हुए इस खेल को फिर से अपनी मंज़ूरी दे दी.
बुल टैमिंग फेस्टिवल, सांडों को काबू करने का खेल, पोंगल, जल्लीकट्टू, मदुरई, दक्षिण भारत
इमेज कैप्शन, यह खेल काफ़ी ख़तरनाक है. सांड को काबू करने की कोशिश और उनकी भागदौड़ से मचने वाली अफ़रातफ़री में चोट लगने का भी ख़तरा होता है. रोक हटाने के बाद जारी अधिसूचना के मुताबिक़, "जल्लीकट्टू के तहत सांड या बैलों को 15 मीटर के दायरे के अंदर ही क़ाबू करना होगा. इसके अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, केरल और गुजरात में परंपरागत बैलगाड़ी दौड़ भी हो सकती है. बशर्तें यह दौड़ एक विशेष ट्रैक पर हो जो दो किलोमीटर से ज़्यादा लंबा न हो."
बुल टैमिंग फेस्टिवल, सांडों को काबू करने का खेल, पोंगल, जल्लीकट्टू, मदुरई, दक्षिण भारत
इमेज कैप्शन, पोंगल दक्षिण भारत में नई फसलों का त्योहार है. इस त्योहार पर होने वाले 'जल्लीकट्टू' के खेल का उत्साह साफ़ नज़र आता है. लेकिन ख़तरनाक खेल में डर और भय का असर भी लोगों के चेहरों पर साफ़ पढ़ा जा सकता है.
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इमेज कैप्शन, लेकिन दूसरे पल खेल का नज़ारा बदल गया था. प्रतिभागी सांड को काबू करने के लिए पूरी ताक़त लगा रहे हैं. ताकि खेल को उसके अंजाम तक पहुंचाया जा सके.
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इमेज कैप्शन, अंततः सांड पर काबू पाने की कोशिशें सफल हो रही है. लेकिन प्रतिभागियों के चेहरे पर डर मौजूद है. उनको पता है कि इस बलशाली पशु को नियंत्रित करना काफ़ी कठिन है.
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इमेज कैप्शन, आख़िरकार गाँव के लोगों को सांड को वश में करने में सफलता सी मिलती दिख रहगी है. लेकिन यह क्षणिक सफलता हाथ से फिसल न जाए, इसलिए प्रतिभागी सांड पर मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
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इमेज कैप्शन, काबू में आए सांड के बेकाबू होते कहां देर लगती है. वह तो हवा की तरह पकड़ से आज़ाद हो भागने लगता है. लेकिन हौसलों की उड़ान के आगे बेकाबू सांड भी पस्त दिखाई दे रहा है.
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इमेज कैप्शन, इस खेल का रोमांच अपने चरम पर है. प्रतिभागी अपनी-अपनी जान लेकर भागते और ख़ुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. ताक़त का मुकाबला ताक़त से ही हो सकता है.