स्टेशन पर गुम होता बचपन

कोलकाता का सियालदह रेलवे स्टेशन से औसतन 14 लाख लोग रोज गुजरते हैं. इसी स्टेशन पर सैकड़ों बच्चों का बचपन भी गुम हो रहा है. फ़ोटोग्राफ़र अरिंदम मुखर्जी ने इसे कैमरे में क़ैद किया है.

शेख आलमगीर, सियालदह रेलवे स्टेशन
इमेज कैप्शन, ये तस्वीर है शेख आलमगीर की. आप इसे नहीं जानते. बीते छह साल से यह कोलकाता के सियालदह रेलवे स्टेशन पर जीवन व्यतीत कर रहा है. भारत के दूसरे सबसे बड़े रेलवे स्टेशन पर आलमगीर जैसे 500 दूसरे बच्चे भी रह रहे हैं.
शेख आलमगीर, सियालदह रेलवे स्टेशन
इमेज कैप्शन, शेख आलमगीर जब सात साल का था, तब उसने अपने घर से भाग निकला था. तंगहाली और बदहाली के बीच शराबी पिता की मार की डर से भागा था शेख आलमगीर.
शेख आलमगीर, सियालदह रेलवे स्टेशन
इमेज कैप्शन, सियालदह रेलवे स्टेशन पर हर दिन करीब 14 लाख लोग गुजरते हैं. इन लोगों के बीच शेख आलमगीर अपनी पहचान के खो जाने से ख़ुश है.
शेख आलमगीर, सियालदह रेलवे स्टेशन
इमेज कैप्शन, आलमगीर ने बताया कि उनके पिता कभी इतना पैसा नहीं कमाते थे कि उसका और उसके छह भाई बहनों को भरपेट भोजन मिल सके. गैर सरकारी संगठन मुक्ति किसी दिन स्टेशन पर रहने वाले बच्चों को मुफ़्त में भोजन करा देती है.
शेख आलमगीर, सियालदह रेलवे स्टेशन
इमेज कैप्शन, आलमगीर और स्टेशन पर रहने वाले दूसरे बच्चे जब तब ड्रग्स का सेवन करते हैं. इनका कहना है कि ड्रग्स के सेवन के बाद भूख नहीं लगती.
शेख आलमगीर, सियालदह रेलवे स्टेशन
इमेज कैप्शन, इनमें से ज़्यादातर बच्चे रेलवे स्टेशन पर भीख मांगकर अपना गुजर बसर करते हैं.
शेख आलमगीर, सियालदह रेलवे स्टेशन
इमेज कैप्शन, वहीं कुछ बच्चे स्टेशन परिसर पर कूड़ा-कचरा बीनकर भी जीवन यापन करते हैं.
शेख आलमगीर, सियालदह रेलवे स्टेशन
इमेज कैप्शन, स्टेशन पर रहने वाले कुछ बच्चे चोरी भी करना सीख जाते हैं. इस तस्वीर में शेख आलमगीर अपने से बड़े बच्चे से झगड़ रहा है क्योंकि उसे लगता है कि उसके पैसे इसने चुरा लिए हैं.
शेख आलमगीर, सियालदह रेलवे स्टेशन
इमेज कैप्शन, शेख आलमगीर उम्र में बड़े बच्चे का मुक़ाबला नहीं कर सका. उससे पिटने के बाद वह रो रहा है. रोजाना ऐसी घटनाएं भी उसके जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं.
शेख आलमगीर, सियालदह रेलवे स्टेशन
इमेज कैप्शन, अरिंदम मुखर्जी बताते हैं कि आख़िरी बार जब आलमगीर से मिले थे तब उसे आइसक्रीम खिलाई थी. लेकिन उसके बाद वे कई बार स्टेशन गए हैं लेकिन आलमगीर उन्हें कहीं दिखाई नहीं दिया है. बार बार तलाशने के बावजूद.