अपने ही वतन में बेघर हुए...

सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक में हालात गृह युद्ध जैसे हैं. लाखों लोग विस्थापित हो गए हैं. ईसाई और मुस्लिम सशस्त्र गुटों के बीच जारी संघर्ष कब रुकेगा, कोई नहीं जानता.

सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक
इमेज कैप्शन, अफ्रीका महाद्वीप के लगभग बीचों बीच स्थित देश सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक (सीएआर) के बारे में संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि यहाँ आंतरिक रूप से विस्थापित हुए लोगों की संख्या पिछले दिसंबर से दोगुना से भी ज़्यादा बढ़कर तकरीबन नौ लाख 35 हज़ार के करीब पहुँच गई है. सिर्फ़ राजधानी बांगुई में ही लगभग पाँच लाख लोगों को अपना घर छोड़ देना पड़ा है. ये शहर की आबादी के तकरीबन आधे हिस्से के बराबर है.
सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक
इमेज कैप्शन, विस्थापित हुए लोगों में करीब 60 फीसदी संख्या बच्चों की है. संयुक्त राष्ट्र ने ये भी चेतावनी दी है कि सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक में अगर हिंसा का बढ़ना यूँ ही जारी रहा तो फौरी मदद का इंतज़ार कर रहे बेहद ज़रूरतमंद लोगों तक पहुँचने की कोशिशों को धक्का लगेगा. दरअसल सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक में ईसाई और मुस्लिम चरमपंथी संगठनों के बीच संघर्ष की स्थिति बनी हुई है.
सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक
इमेज कैप्शन, इस देश पर मुस्लिम विद्रोही नेता मिशेल जोटोडिया का शासन है जिन्होंने पिछले मार्च में तत्कालीन राष्ट्रपति फ़्रांस्वा बोज़िजे से सत्ता हथिया ली थी. फ़्रांस्वा बोज़िजे ईसाई समुदाय के हैं और सत्ता से हटाए जाने के बाद वे निर्वासन के लिए पलायन कर गए. इस बीच अफ़्रीकन यूनियन ने सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक में शांति बनाए रखने के लिए चार हज़ार सैनिक भेजे हैं.
सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक
इमेज कैप्शन, सैनिक सहायता देने वाले देशों में फ्रांस भी है जिसने अपने 1600 जवान यहाँ तैनात कर रखे हैं. एक वक्त था जब सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक फ्रांस का उपनिवेश हुआ करता था. यहाँ के खराब हालात का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई देशों ने सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक से अपने नागरिकों को हटाना शुरू कर दिया है.
सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक
इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी संस्था ने चेतावनी दी है कि आम नागरिकों पर हमले और लूटपाट की घटनाओं और शरणार्थी शिविरों में सशस्त्र गुटों की मौजूदगी की वजह से ज़रूरतमंद लोगों को मानवीय सहायता पहुँचाने की प्रक्रिया को गंभीर नुकसान पहुँच रहा है. एजेंसी ने एक बयान में कहा है, "हमारे स्टाफ ने रिपोर्ट दी है कि दोबारा हमलों के डर से लोग जंगलों में जाकर छुप गए हैं."
सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक
इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के बयान में कहा गया है कि बांगुई एयरपोर्ट के शरणार्थी शिविर में रह रहे लोगों की संख्या बीते हफ्ते में दोगुना बढ़कर तकरीबन एक लाख हो गई है. संयुक्त राष्ट्र ने भी आपातकालीन स्थिति के मद्देनज़र ज़्यादा तादाद में सैनिकों को तैनात किए जाने की माँग की है. हवाई अड्डे पर मौजूद फ्रांसीसी और अफ्रीकन यूनियन के सैनिक सहायता सामग्री की पर्याप्त सुरक्षा देने में नाकाम साबित हो रहे हैं.
सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक
इमेज कैप्शन, सौ दिनों की आपातकालीन योजना के तहत सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक में जारी मानवीय संकट से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने 152 मिलियन डॉलर या तकरीबन नौ सौ करोड़ रुपये की माँग की है. बांगुई एयरपोर्ट पर मेडिकल सहायता मुहैया करा रही एकमात्र संस्था 'मेडिसिंस सैंस फ्रंटियर्स' ने भी इस बात की पुष्टि की है कि वहाँ जारी संघर्ष की वजह से उसे अपनी गतिविधियों को सीमित करना पड़ा है. बीते दिनों में हुई गोलीबारी की दो घटनाओं में दो बच्चे मारे गए थे जबकि दर्जनों घायल हो गए थे.