मछली पकड़ने जाते हैं बंदूक़ लेकर

यहां झगड़ा न ज़मीन का है, न पानी का पर हालात कुछ ऐसे हैं कि खाने और चारागाह के लिए कीनिया में ख़ूनी संघर्ष आम बात है.

तुरकाना समुदाय
इमेज कैप्शन, सिमोन चोको जब कीनिया की तुरकाना झील में मछली मारने जाते हैं, तो उनके पास एक बंदूक़ और मछली का जाल होता है. कीनिया के पश्चिमोत्तर के इस इलाक़े में भयानक सूखा है. यहीं तुरकाना समुदाय के लोग रहते हैं, जिनका पड़ोसी इथोपिया की सीमा के पार रहने वाले लोगों से ख़ूनी संघर्ष चला आ रहा है. सिमोन चोको इसी तुरकाना समुदाय के हैं.
तुरकाना समुदाय
इमेज कैप्शन, सिमोन कहते हैं, "मैं एक मछुआरा हूँ. जब बहुत छोटा था, तभी से यह काम कर रहा हूँ. जिस दौर में हम जी रहे हैं, वैसे हालात पहले कभी नहीं थे. ख़ुद को हमलों से बचाने के लिए हर किसी के पास हथियार है." तुरकाना घुमंतू समुदाय है जिनके जानवरों के लिए घास धीरे-धीरे कम होती जा रही है. तुरकाना महिला बकरी का दूध दुह रही है.
तुरकाना समुदाय
इमेज कैप्शन, हालात बदले और तुरकाना समुदाय के लोगों को बदलना पड़ा. कई लोग अब मछली पकड़ने का काम करने लगे हैं. इसकी शुरुआत 60 के दशक में हुई, तब भयानक सूखे में उनके जानवर ख़त्म हो गए थे. सरकार ने ऐसे समुदायों को मछली पकड़ने के काम से जोड़ने की कोशिश की. तुरकाना झील का इलाक़ा ऐसा ही था, जहाँ पानी बहुत था और कम लोगों का इस ओर ध्यान गया था. तस्वीर में गोलियों का जख्म दिखाता एक तुरकाना लड़ाका.
तुरकाना समुदाय
इमेज कैप्शन, सरकार ने तुरकाना समुदाय के लोगों को मछली पकड़ने वाले जाल दिए. उन्हें झील के किनारे गाँव बसाकर रहने की जगह दी. यह इस समुदाय के लिए मुश्किल भरी पेशकश थी. तुरकाना के मर्दों की हैसियत उनके जानवरों की संख्या से आंकी जाती थी और "मछली खाने वाला" कहा जाना उनके लिए अपमानजनक था. मगर आहिस्ता-आहिस्ता उन्होंने नई ज़िंदगी को अपना लिया. कुछ ने मछली बेचकर नए जानवर भी खरीदे ताकि वे चरवाहे वाली अपनी पुरानी ज़िंदगी में लौट सकें.
तुरकाना समुदाय
इमेज कैप्शन, अब हालात फिर से बदले हैं. तुरकाना झील की मछलियाँ खत्म हो चली हैं. खाने की कमी हो गई है और पड़ोसी इथोपिया के धासनक समुदाय के लोगों से उनका संघर्ष शुरू हो गया है. दक्षिणी इथोपिया में बड़ी खेती परियोजनाओं के कारण धासनक लोगों के लिए चारागाह की ज़मीन कम पड़ रही है. वे मछली और घास की तलाश में अब कीनियाई ज़मीन पर दस्तक देने लगे हैं.
तुरकाना समुदाय
इमेज कैप्शन, तुरकाना समुदाय के संघर्ष को एक उदाहरण माना जा सकता है. कीनिया के कई हिस्सों में अलग-अलग समुदायों के बीच चारागाह भूमि, सियासी वजहों और सीमितों संसाधनों को लेकर संघर्ष रहता है. तुरकाना लोगों ने अपने जान-माल की हिफ़ाज़त के लिए संगठित रूप से एक सशस्त्र गुट बना लिया है. ये लड़ाई धीरे-धीरे खतरनाक मोड़ ले रही है. चारे के अभाव में भूख से कमजोर पड़े एक जानवर को सहारा देते तुरकाना समुदाय के मर्द.
तुरकाना समुदाय
इमेज कैप्शन, हालात एक क्षेत्रीय संघर्ष की शक्ल अख़्तियार कर रहे हैं. उनके पास अब ऑटोमेटिक हथियार हैं और लोग बताते हैं कि जुलाई के बाद से यहाँ तक़रीबन दर्जन भर तुरकाना मर्द मारे जा चुके हैं. तुरकाना समुदाय के सरदार पिउस चुचु कहते हैं, "तुरकाना और धासनक समुदाय की रंजिश बहुत पुरानी है, लेकिन इससे पहले उनकी लड़ाईयाँ भाले या अन्य परंपरागत हथियारों से होती थीं. अब उनके हाथों में एके-47 सरीखे हथियार हैं." कई लोगों का कहना है कि यहाँ के हालात एक रोज़ ज़रूर बदलेंगे क्योंकि बदलना ही क़ुदरत का क़ानून है. (सभी फोटो और कैप्शन: रायटर्स)