'तुमको देखा तो ये ख़्याल आया'

अभिनेता फ़ारूक़ शेख का 65 साल की आयु में दुबई में निधन हो गया. फ़ारूक़ शेख हिंदी सिनेमा के कस्बाई निम्न-मध्यवर्गीय चरित्रों को जीवंत करने के लिए जाने जाते हैं.

फ़ारूक़ शेख, दीप्ति नवल
इमेज कैप्शन, 1948 में जन्मे फ़ारूक़ शेख हिंदी फ़िल्मों में साधारण मध्यवर्गीय चरित्र के प्रतिनिधि माने जाते थे. 'चश्मे बद्दूर' (1981) में फ़ारूक़ शेख और दीप्ति नवल की जोड़ी को दर्शकों को ख़ूब सराहा था.
फ़ारूक़ शेख
इमेज कैप्शन, फ़ारूक़ शेख को साल 2010 में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था. उन्हें यह पुरस्कार 'लाहौर' (2010) फ़िल्म के लिए मिला था.
फ़ारूक़ शेख
इमेज कैप्शन, फ़ारूक़ शेख दूरदर्शन पर 'जीना इसी का नाम है' नामक मशहूर शो लेकर आते थे. फ़ारूक़ ने अपने अभिनय जीवन के शुरुआत में 'गरम हवा' जैसी मशहूर फ़िल्म की थी. 'गरम हवा' के निर्देशक थे एमएस सथ्यू.
फ़ारूक़ शेख
इमेज कैप्शन, फ़ारूक़ शेख ने अभिनय की शुरुआत इंडियन पीपुल्स थियेटर यानी इप्टा से की थी. इप्टा में उनके निर्देशक थे सागर सरहदी. बाद में फ़ारूक़ शेख ने सागर सरहदी की मशहूर फ़िल्म 'बाज़ार' में अहम भूमिका निभाई.
फ़ारूक़ शेख
इमेज कैप्शन, फ़ारूक़ शेख और दीप्ति नवल की जो़ड़ी दर्शकों को ख़ूब पसंद आती थी. 'लिसन अमाया' (2013) फ़िल्म में फ़ारूक़ के साथ दीप्ति नवल और स्वरा भाष्कर ने काम किया था.
फ़ारूक़ शेख
इमेज कैप्शन, इसी साल दिसंबर के पहले हफ्ते में रिलीज 'क्लब-60' फ़ारूक़ शेख की आख़िरी फ़िल्म है. इस फ़िल्म में उनके साथ सारिका और रघुवीर यादव मुख्य भूमिका में थे.