विस्थापन का दर्द इन फ़लीस्तीनियों से पूछिए

दुनिया भर में विस्थापन का दर्द झेलने वाला सबसे बड़ा समुदाय फ़लीस्तीनियों का है. शरणार्थी शिविरों में करीब 50 लाख फ़लीस्तीनी रह रहे हैं.

फलीस्तीन शरणार्थियों का परिवार
इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र की राहक एजेंसी ने अपने अर्काइव की तस्वीरों को डिजिटल रूप में पेश किया है. इनमें फ़लीस्तीनी शरणार्थियों की तस्वीरें बेहद ख़ास हैं. मोटे तौर पर इनमें वैसे फ़लीस्तीनी शरणार्थी हैं जिन्हें 1948 में मध्य पूर्व युद्ध और 1967 में जब इसराइल ने पश्चिमी तट और गज़ा पट्टी पर कब्ज़ा कर लिया था, तब देश छोड़ना पड़ा था.
अम्मान का कैंप, 1971
इमेज कैप्शन, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, पश्चिमी तट और गज़ा पट्टी में 58 अधिकृत शरणार्थी शिविर हैं. इसकी देखरेख का जिम्मा यूनाइटेड नेशंस रिलीफ़ एंड वर्क्स एजेंसी(यूएनआरडब्ल्यूए) फॉर फ़लीस्तीनी रिफ्यूज़ी के पास है. जिसकी स्थापना 1949 में हुई थी.
एक शरणार्थी शिविर में पढ़ाई करते दो फ़लीस्तीनी
इमेज कैप्शन, दुनिया भर में अपनी जगह से विस्थापित समुदाय में सबसे बड़ा समुदाया फ़लीस्तीनी लोगों का ही है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक करीब 50 लाख फ़लीस्तीनियों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ा है.
शरणार्थी शिविर के एक स्कूल में बच्चों को पढ़ाती शिक्षिका
इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसी ने शरणार्थी फ़लस्तीनियों के लिए करीब 700 स्कूल खोले हैं जिनमें करीब 5 लाख बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं.
कैंप में नर्स को दिखाती हुए एक छोटी बच्ची
इमेज कैप्शन, फ़लीस्तीनी लोगों के इन शरणार्थी शिविर में शुरुआती दिनों में काफी भीड़ और सुविधाओं के कम होने से लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना होता था.
शरणार्थी शिविर में इलाज़ करता डॉक्टर
इमेज कैप्शन, जॉर्डन के टेंट कैंप में बने शरणार्थी शिविर में 1967 में बेल्जियम का डॉक्टर एक महिला और उसकी बच्ची का इलाज़ करते नज़र आ रहे हैं.
फ़लीस्तीनी शरणार्थी शिविर
इमेज कैप्शन, यूएनआरडब्ल्यूए ऐसी एजेंसी है जो आम लोगों की मदद से चल रही है. इसे कई संस्थाएं और चैरेटी संगठनों से भी मदद मिलती है.
प्रशिक्षण शिविर
इमेज कैप्शन, यूएनआरडब्ल्यूए फ़लीस्तीनी शरणार्थियों को व्यावसायिक और तकनीकी प्रशिक्षण भी देते हैं ताकि उन्हें आजीविका मिल सके.
फ़लीस्तीनी शरणार्थी शिविर
इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसी ने अगर फ़लीस्तीनी शरणार्थियों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास नहीं किए होते तो इतनी बड़ी आबादी दुनिया भर की लिए चुनौती बन जाती.