पर्यावरण के ज़हर से निकली ख़ूबसूरती

कलाकार और पर्यावरणविद् जॉन सबरॉ कलाकृति बनाने के लिए प्रकृति के प्रति संवेदनशील तरीके ढूंढते रहते हैं. उन्होंने प्रदूषित नदियों से निकले धातु के अवशेषों से तैयार पेंट से कुछ अमूर्त तस्वीरें बनाई हैं.

जॉन सबरॉ
इमेज कैप्शन, पर्यावरण के प्रति संवेदनशील तरीके से कला के सृजन के लिए जॉन सबरॉ ने प्रदूषण फैला रहे पदार्थों का इस्तेमाल किया. उन्होंने ओहायो विश्वविद्यालय के इंजीनियर डॉ गाइ रीफ़लर के साथ मिलकर ओहायो की बेकार पड़ी कोयला खदानों में पड़े पदार्थों से कई तरह के रंग बनाए.
जॉन सबरॉ
इमेज कैप्शन, पानी में पड़े लौह अयस्क और दूसरी धातुओं की रासायनिक क्रिया से अम्ल और कीचड़ जैसा चटकीला पदार्थ बनता है. रीफ़लर और सबरॉ ने पर्यावरण के लिए नुकसानदेह इन धातुओं को पानी से निकालने और उससे रोगन हासिल करने का एक तरीका खोज निकाला.
जॉन सबरॉ
इमेज कैप्शन, रीफ़लर ने इन धातुओं में ऑक्सीकरण की दर को नियंत्रित करने में सफलता पा ली. इससे इन लोगों को लौह अयस्क से बढ़िया रंग हासिल करने में कामयाबी मिल गई जिसे सुखाने के बाद ऑयल पेंट बनाए जा सकते हैं.
जॉन सबरॉ
इमेज कैप्शन, जॉन और रीफ़लर ने कई रंगों को दर्जनों तहों में मिलाया और उन गाढ़े तरलों को अलग-अलग रखा गया, फिर जमने दिया. इनको हवा, तापमान और आद्रता के संपर्क में कई दिनों, हफ़्तों और महीनों तक रखा गया.
जॉन सबरॉ
इमेज कैप्शन, इनका उद्देश्य इन पेंटों में से कुछ को बेचना है. उससे मिलने वाले फ़ायदे को प्रदूषित हो रही पानी की धाराओं को साफ़ करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.
जॉन सबरॉ
इमेज कैप्शन, सबरॉ दूसरे तरीकों और पदार्थों से भी काम करते है् ताकि पर्यावरण सहिष्णु ढंग से काम करने का एक टिकाऊ तरीका विकसित किया जा सके. वह लिनेन, रीसाइकिल्ड लकड़ी और एल्यूमिनियम के पहचान चिन्हों पर भी पेंटिंग करते हैं.
जॉन सबरॉ
इमेज कैप्शन, अपनी क्रोमा शृंखला के बारे में सबरॉ का कहना है, “यह अमूर्त तस्वीरें पृथ्वी के समूचे पारिस्थिकीय तंत्र और उसके अंदर की भूमिकाओं की प्राकृतिक अवधारणा पर केंद्रित हैं.”
जॉन सबरॉ
इमेज कैप्शन, ओहायो वेसलेयन विश्वविद्यालय के रिचर्ड एम रॉस कला संग्रहालय में में लुमिनस नाम की एक प्रदर्शनी में इन तस्वीरों को रखा गया है. इनका प्रदर्शन 6 अक्तूबर तक किया जाएगा.