ज़िंदगी के लिए संघर्ष

मध्य अफ़्रीक़ी देश सेंट्रल अफ़्रीक़ी रिपब्लिक (कार) में व्यवस्था ढह गई है. कई इलाक़ों पर विद्रोहियों का क़ब्ज़ा है और बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया नहीं हैं. देश में बाल मृत्यु दर दुनिया में सबसे ज़्यादा है.

कार में ज़िंदगी के लिए संघर्ष
इमेज कैप्शन, किमेने पाकानाले (22 वर्ष) सेंट्रल अफ़्रीक़न रिपब्लिक की ख़ुशक़िस्मत मांओं में से एक हैं. उनका तीसरा बच्चा सुरक्षित ढंग से अस्पताल में पैदा हुआ है. मार्च में विद्रोहियों के सत्ता हथिया लेने के बाद जारी संघर्ष के चलते ज़्यादातर लोगों को घर छोड़कर भागना पड़ा है. महिलाएं जंगल में प्रशिक्षित लोगों के अभाव में ही बच्चों को जन्म देने पर मजबूर हैं.
कार में ज़िंदगी के लिए संघर्ष
इमेज कैप्शन, कार में बाल मृत्यु दर सबसे अधिक है. 10 में से एक बच्चा पहला साल भी पूरा नहीं कर पाता. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार विद्रोही सेलेका गठबंधन के राष्ट्रपति फ्रेंकोएज़ बोज़ीज़े को अपदस्थ करने के बाद से "कानून और व्यवस्था पूरी तरह ख़त्म हो गई है" और इसके चलते कार एक असफल देश बन सकता है.
कार में ज़िंदगी के लिए संघर्ष
इमेज कैप्शन, पाकानाले अपने पति और तीन बच्चों के साथ ओबो में रहती हैं. यह इलाक़ा जोसेफ़ कोनी के नेतृत्व वाली लॉर्ड्स रेज़िस्टेंस आर्मी (एलआरए) का गढ़ है. कार में सालों से जारी अशांति के चलते युगांडा के विद्रोही गुटों को यहां जड़ें जमाने का मौका मिल गया है. पाकानाले कहती हैं कि छोटे कस्बे में जीवन कठिन है. ख़ासतौर पर मार्च में एलआरए विद्रोहियों के हमले तेज करने के बाद दिक्कत और बढ़ गई है. विद्रोहियों की मौजूदगी से राजधानी बांगुई से 900 किलोमीटर दूर ओबो देश के बाक़ी हिस्सों से कट गया है क्योंकि अब कोई भी सड़क मार्ग से यात्रा करने की हिम्मत नहीं करता.
कार में ज़िंदगी के लिए संघर्ष
इमेज कैप्शन, कार में जारी संघर्ष के चलते ओबो में लोग दूर-दूर से आ रहे हैं इसलिए क़स्बे के संसाधनों पर दबाव पड़ रहा है. क्योंकि लोग यहां से जाने में डर रहे हैं इसलिए क़स्बे के लोगों को उपलब्ध सीमित ज़मीन पर ही खेती करनी पड़ रही है. पकानाले और दूसरे परिवारों के लिए इसका मतलब है कम पैसा और कम भोजन.
कार में ज़िंदगी के लिए संघर्ष
इमेज कैप्शन, देश के दक्षिण-पश्चिम इलाक़े में खाने की क़ीमतें आसमान छू रही हैं और कुपोषण बढ़ रहा है, ख़ासतौर पर राजधानी से 70 किलोमीटर दूर बाटालिमो कस्बे में. बाटालिमो में रिपब्लिक ऑफ़ कांगो में हिंसा से बचकर आने वाले लोगों के लिए एक शरणार्थी शिविर लगाया गया है. 32 साल के एनाटोले न्ज़ू इस शिविर के अस्पताल में नर्स हैं जिसमें स्थानीय लोगों को भी इलाज किया जाता है.
कार में ज़िंदगी के लिए संघर्ष
इमेज कैप्शन, लूट और डकैती के कारण बहुत से सहायक कार्यकर्ता और स्वास्थ्य मंत्रालय कर्मचारी भाग गए हैं. लेकिन न्ज़ू नहीं. वह लगातार बढ़ रहे बीमारों की देखरेख करते हैं और बुनियादी चिकित्सा उपलब्ध करवाने के लिए 14 घंटे तक काम करते हैं. अस्पताल के कर्मचारी बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे हुए हैं. यहां फ़ोन बमुश्किल मिलते हैं और इंटरनेट कवरेज तो जैसे है ही नहीं. एक मरीज़ का कहना है कि जब "अनियंत्रित सैनिक बंदूकों के साथ शिविर में घुस आए" तो उन्होंने अपने दो बच्चों के साथ तीन हफ़्ते झाड़ियों में छुपकर काटे.
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इमेज कैप्शन, एक वक़्त स्थिति ऐसी थी कि सिर्फ़ 75 दिन के लिए ही दवाइयां मौजूद थीं और सुरक्षा इतनी कमज़ोर थी कि अस्पताल स्थापित करने वाली सहायता संस्था मर्लिम की गाड़ियों को पड़ोस के पड़ोसी देश कांगो तक ले जाना पड़ता था. न्ज़ू कहते हैं, "हालांकि मैं कांगो से हूं लेकिन यहां भी सभी मेरे भाई-बहन हैं और यहां इनकी सेवा करने के मौक़े के लिए मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूं."
कार में ज़िंदगी के लिए संघर्ष
इमेज कैप्शन, विद्रोहियों के सत्ता क़ब्ज़ाने के बाद से सुबह जब न्ज़ू अस्पताल आते हैं तो वहां लोगों की लंबी लाइनें लगी होती हैं. शरणार्थी और स्थानीय लोग अस्पताल खुलने के एक घंटे पहले से ही पहुंचने लगते हैं. ज़्यादातर मलेरिया, डायरिया और सांस के रोगों के शिकार होते हैं. इन सभी बीमारियों का इलाज हो सकता है लेकिन दवा के अभाव में जानलेवा हो सकती हैं.
कार में ज़िंदगी के लिए संघर्ष
इमेज कैप्शन, न्ज़ू 2009 में कांगो के अपने गांव में हिंसा से बचकर बाटालिमो आए थे. वह ख़ुद को ख़ुशकिस्मत मानते हैं कि वह अपनी पत्नी और छह बच्चों के परिवार के साथ हैं. जब वह यहां आए थे तब बाटालिमो में बस जंगल था और कुछ झोपड़ियां बनी हुई थीं. अब यहां 6,000 शरणार्थी हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने चेतावनी दी है कि कार में मौजूदा संकट पहले ही कमज़ोर सुरक्षा वाले इलाक़े के लिए "गंभीर ख़तरा" पैदा करती है.
कार में ज़िंदगी के लिए संघर्ष
इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वैलेरी अमोस के अनुसार कार की 46 लाख की आबादी के एक तिहाई को भोजन, पानी, छत, और स्वास्थ्य सेवाओं की ज़रूरत है. बहुत से परिवार हर समय एक कंद मूल, कसावा, ही खाते हैं. बहुत से बच्चे वाशिरोकोर के शिकार हो जाते हैं, जो बचपन में कुपोषण का एक गंभीर प्रकार है, इसमें पेट सूज जाता है, शरीर में पानी जमा हो जाता है और अंगों को गंभीर नुक्सान हो सकता है.
कार में ज़िंदगी के लिए संघर्ष
इमेज कैप्शन, अस्पताल चलाने वाली संस्थआ मर्लिन को चिंता है कि देश के कुछ हिस्सों में जीने के लिए ज़रूरी चीज़ों की कमी के चलते बाल मुत्यु दर तिगुनी हो सकती है. विद्रोहियों के सत्ता में आने के बाद से 32 लाख लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं है. सेलेका विद्रोही, जिन्हें न तो वेतन मिलता है और न ही कोई उन पर किसी का नियंत्रण है, लूटपाट और अपराधों में लगे हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र ने अब अफ्रीकी संघ की 3000 की संख्या वाली शांति सेना को नियुक्त करने की मांग की है.
कार में ज़िंदगी के लिए संघर्ष
इमेज कैप्शन, पाकानाले ने 17 जुलाई को बेटे को जन्म दिया था और ओबो में अस्पताल छोड़ने से पहले उसे तपेदिक और पोलियो का वैक्सीन लगाया गया था. कई दूसरे अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्र लूटपाट के शिकार हुए हैं और वैक्सीनेशन की कोशिशें थम गई हैं. इसके चलते ख़सरा और टिटनेस जैसे रोग तेजी से फैल रहे हैं. (तस्वीरें: जेकब ज़ोकरमेन, सहायता संस्था मर्लिन के कार्यकर्ता)