ये आग कब बुझेगी?

झारखंड में झरिया की कोयला खदानों में पिछले 80 साल से आग लगी है. तस्वीरों में देखिए आग से प्रभावित लोगों की ज़िंदगी और उनकी परेशानी.

झारखंड की झरिया कोयला खदानों में पिछले 80 साल से ज़मीन के भीतर आग लगी है. आग बुझाने की अब तक की गई सारी कोशिशें नाकाम रही हैं. सभी तस्वीरें: अरिंदम मुखर्जी
इमेज कैप्शन, झारखंड की झरिया कोयला खदानों में पिछले 80 साल से ज़मीन के भीतर आग लगी है. आग बुझाने की अब तक की गई सारी कोशिशें नाकाम रही हैं. सभी तस्वीरें: अरिंदम मुखर्जी
डाल्टेनगंज जैसी जगहों में आग ज़मीन के ऊपर भी लगी है.
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झरिया के खदानों में लगी आग की वजह से दिन बेहद गर्म और दुर्गंध से भरे होते हैं और आसपास की खदानों से भी लगातार धुआं उठता रहता है.
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खदानों की आग और उससे निकलनेवाले ज़हरीले धुएं की वजह से शहर और उसके आसपास रहनेवाले लोगों की ज़िंदगी बुरी तरह प्रभावित है. आग और धुएं की वजह से इलाके के पेड़-पौधे ख़त्म से हो गए हैं.
इमेज कैप्शन, खदानों की आग और उससे निकलनेवाले ज़हरीले धुएं की वजह से शहर और उसके आसपास रहनेवाले लोगों की ज़िंदगी बुरी तरह प्रभावित है. आग और धुएं की वजह से इलाके के पेड़-पौधे ख़त्म से हो गए हैं.
तस्वीर में एक युवती ज़मीन में लगी आग और उससे निकलनेवाली ज़हरीली गैस के बीच गुज़रती हुई. जलती खदानों के आसपास का तापमान इतना ज़्यादा होता है और हवा इतनी ज़्यादा प्रदूषित होती है कि यहां के बाशिंदों को स्वास्थ्य संबंधी तमाम परेशानियां पैदा हो गई हैं.
इमेज कैप्शन, तस्वीर में एक युवती ज़मीन में लगी आग और उससे निकलनेवाली ज़हरीली गैस के बीच गुज़रती हुई. जलती खदानों के आसपास का तापमान इतना ज़्यादा होता है और हवा इतनी ज़्यादा प्रदूषित होती है कि यहां के बाशिंदों को स्वास्थ्य संबंधी तमाम परेशानियां पैदा हो गई हैं.
झरिया के कोयला खदान के इलाके इंसानों के रहने योग्य नहीं हैं लेकिन बड़ी संख्या में सुविधा विहीन लोग इस इलाके में रहने को मजबूर हैं. ग़रीबी की वजह से तमाम लोग अपने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को नज़रअंदाज़ कर इन इलाकों में रहने को मजबूर हैं.
इमेज कैप्शन, झरिया के कोयला खदान के इलाके इंसानों के रहने योग्य नहीं हैं लेकिन बड़ी संख्या में सुविधा विहीन लोग इस इलाके में रहने को मजबूर हैं. ग़रीबी की वजह से तमाम लोग अपने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को नज़रअंदाज़ कर इन इलाकों में रहने को मजबूर हैं.
ये हैं 75 वर्षीय सरला देवी जो कुजमा की झोपड़पट्टी में रहती हैं और दमे की मरीज़ हैं. इस क्षेत्र में रहनेवाले 60 फ़ीसदी से ज़्यादा लोग बीमार हैं. ज़हरीली गैस, कोयले की धूल और धुएं की वजह से यहां के लोगों की ज़िंदगी तबाह होती जा रही है.
इमेज कैप्शन, ये हैं 75 वर्षीय सरला देवी जो कुजमा की झोपड़पट्टी में रहती हैं और दमे की मरीज़ हैं. इस क्षेत्र में रहनेवाले 60 फ़ीसदी से ज़्यादा लोग बीमार हैं. ज़हरीली गैस, कोयले की धूल और धुएं की वजह से यहां के लोगों की ज़िंदगी तबाह होती जा रही है.
कई साल तक झरिया के खदानों की दुर्दशा की मीडिया में चर्चा होते रहने के बाद अधिकारियों ने एक पुनर्वास प्रोजेक्ट की घोषणा की है.
इमेज कैप्शन, कई साल तक झरिया के खदानों की दुर्दशा की मीडिया में चर्चा होते रहने के बाद अधिकारियों ने एक पुनर्वास प्रोजेक्ट की घोषणा की है.
यहां रहनेवाले कई खनिक और उनके परिजन आग लगी खदानों से कुछ कोयला हासिल के करने की कोशिश में रहते हैं और फिर उसे ग़ैरक़ानूनी बाज़ार में बेचकर कुछ पैसे हासिल करने का प्रयास करते हैं. तस्वीर में एक युवती खुली खदान से बाल्टी में कोयला ले जाती नज़र आ रही है.
इमेज कैप्शन, यहां रहनेवाले कई खनिक और उनके परिजन आग लगी खदानों से कुछ कोयला हासिल के करने की कोशिश में रहते हैं और फिर उसे ग़ैरक़ानूनी बाज़ार में बेचकर कुछ पैसे हासिल करने का प्रयास करते हैं. तस्वीर में एक युवती खुली खदान से बाल्टी में कोयला ले जाती नज़र आ रही है.
कुजमा इलाके की बदहाली को देखते हुए अधिकारियों ने वहां रहनेवालों को झोपड़पट्टी खाली करने का नोटिस जारी किया है. लेकिन यहां रहनेवाले लोग इतने ग़रीब हैं कि वो नए इलाकों में बसने के लिए नहीं जा पा रहे हैं और यहीं रहने को मजबूर हैं.
इमेज कैप्शन, कुजमा इलाके की बदहाली को देखते हुए अधिकारियों ने वहां रहनेवालों को झोपड़पट्टी खाली करने का नोटिस जारी किया है. लेकिन यहां रहनेवाले लोग इतने ग़रीब हैं कि वो नए इलाकों में बसने के लिए नहीं जा पा रहे हैं और यहीं रहने को मजबूर हैं.
झरिया शहर की सीमा पर स्थित इंदिरा चौक पर एक व्यक्ति टूटी हुई झोपड़ी से गुज़रता हुआ. वहां के बाशिंदों का कहना है कि पिछले 10 सालों में आग उनके घर तक पहुंच गई है.
इमेज कैप्शन, झरिया शहर की सीमा पर स्थित इंदिरा चौक पर एक व्यक्ति टूटी हुई झोपड़ी से गुज़रता हुआ. वहां के बाशिंदों का कहना है कि पिछले 10 सालों में आग उनके घर तक पहुंच गई है.
खदान की आग की वजह से हुए भूस्खलन में पिछले पांच सालों में कम के कम पांच लोग मारे गए हैं.
इमेज कैप्शन, खदान की आग की वजह से हुए भूस्खलन में पिछले पांच सालों में कम के कम पांच लोग मारे गए हैं.