जहां जाते थे नेहरू, पंत और शास्त्री जी...

कभी राजनेताओं और हिंदी साहित्यकारों का गढ़ रही इलाहाबाद की भारती भवन लाइब्रेरी तस्वीरों में.

इलाहाबाद शहर की हिंदी जगत में एक समय तूती बोलती थी, लेकिन आज हरिवंश राय बच्चन, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा के इस शहर में हिंदी संघर्ष कर रही है. ऐतिहासिक भारती भवन पुस्तकालय की खस्ता हालत इसकी एक बानगी भर है. (सभी तस्वीरें: अंकित पांडे)
इमेज कैप्शन, इलाहाबाद शहर की हिंदी जगत में एक समय तूती बोलती थी, लेकिन आज हरिवंश राय बच्चन, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा के इस शहर में हिंदी संघर्ष कर रही है. ऐतिहासिक भारती भवन पुस्तकालय की खस्ता हालत इसकी एक बानगी भर है. (सभी तस्वीरें: अंकित पांडे)
भारती भवन पुस्तकालय की स्थापना 1889 में पढ़ने-लिखने के शौक़ीन लाला बृजमोहन ने की थी. अगले कई दशकों तक ये पुस्तकालय हिंदी प्रेमियों की गतिविधियों का केंद्र बना रहा.
इमेज कैप्शन, भारती भवन पुस्तकालय की स्थापना 1889 में पढ़ने-लिखने के शौक़ीन लाला बृजमोहन ने की थी. अगले कई दशकों तक ये पुस्तकालय हिंदी प्रेमियों की गतिविधियों का केंद्र बना रहा.
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पंत, हरिवंश राय बच्चन, पंडित नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और हिंदी जगत की नामचीन हस्तियों का जुड़ाव इस पुस्तकालय से बना रहा.
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76 साल के श्रीनिवास पिछले कई दशकों से पुस्तकालय की देख-रेख कर रहे हैं और अपनी शिक्षा-दीक्षा का श्रेय भी वो इसी संस्थान को देते हैं. वो कभी स्कूल नहीं गए. पढ़ना-लिखना उन्होंने इसी पुस्तकालय में सीखा.
इमेज कैप्शन, 76 साल के श्रीनिवास पिछले कई दशकों से पुस्तकालय की देख-रेख कर रहे हैं और अपनी शिक्षा-दीक्षा का श्रेय भी वो इसी संस्थान को देते हैं. वो कभी स्कूल नहीं गए. पढ़ना-लिखना उन्होंने इसी पुस्तकालय में सीखा.
श्रीनिवास बताते हैं कि पुस्तकालय का सालाना बजट महज 2 लाख रुपए का है, जिसमें छह कर्मचारियों का वेतन और रख रखाव दोनों शामिल हैं.
इमेज कैप्शन, श्रीनिवास बताते हैं कि पुस्तकालय का सालाना बजट महज 2 लाख रुपए का है, जिसमें छह कर्मचारियों का वेतन और रख रखाव दोनों शामिल हैं.
आज से बीस साल पहले तक पुस्तकालय के सदस्यों की संख्या कई हज़ार में होती थी, लेकिन आज महज़ 800 रह गई है जिनमें से कुछ ही सदस्य नियमित रूप से आते हैं.
इमेज कैप्शन, आज से बीस साल पहले तक पुस्तकालय के सदस्यों की संख्या कई हज़ार में होती थी, लेकिन आज महज़ 800 रह गई है जिनमें से कुछ ही सदस्य नियमित रूप से आते हैं.
इस पुस्तकालय में 'द लीडर' कई ऐसे ऐतिहासिक समाचार पत्रों
की प्रतियों का संग्रह है.
इमेज कैप्शन, इस पुस्तकालय में 'द लीडर' कई ऐसे ऐतिहासिक समाचार पत्रों की प्रतियों का संग्रह है.
पुस्तकालय में कई दुर्लभ पांडुलिपियां भी हैं जो 300 साल तक पुरानी हैं और यहां 1892 से रखी हैं.
इमेज कैप्शन, पुस्तकालय में कई दुर्लभ पांडुलिपियां भी हैं जो 300 साल तक पुरानी हैं और यहां 1892 से रखी हैं.
यहां कई धार्मिक ग्रंथों की हिंदी में अनुवादित प्रतियां भी हैं.
इमेज कैप्शन, यहां कई धार्मिक ग्रंथों की हिंदी में अनुवादित प्रतियां भी हैं.
श्रीनिवास बताते हैं कि धन के अभाव के कारण पुस्तकों का रख रखाव कठिन होता जा रहा है और नई किताबें अधिकांशत: दान के रूप में आती हैं.
इमेज कैप्शन, श्रीनिवास बताते हैं कि धन के अभाव के कारण पुस्तकों का रख रखाव कठिन होता जा रहा है और नई किताबें अधिकांशत: दान के रूप में आती हैं.
पुस्तकालय को कई राजनेताओं का सहयोग पत्रों के रूप में मिलता रहा है, पर कर्मचारी और यहां आनेवाले चाहते हैं कि प्रदेश सरकार इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षण दे ताकि ये मौजूदा और आनेवाली पीढ़ियों के लिए शोध पर सामग्री का केंद्र बनी रह सके.
इमेज कैप्शन, पुस्तकालय को कई राजनेताओं का सहयोग पत्रों के रूप में मिलता रहा है, पर कर्मचारी और यहां आनेवाले चाहते हैं कि प्रदेश सरकार इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षण दे ताकि ये मौजूदा और आनेवाली पीढ़ियों के लिए शोध पर सामग्री का केंद्र बनी रह सके.