टाँगें नहीं हैं, लेकिन सिपाही दौड़ेगा...

इस सिपाही ने अफगानिस्तान में हुए एक धमाके में अपनी दोनों टांगें गँवा दी थीं लेकिन अब वो लोगों को हौंसला दे रहे हैं. तस्वीरों में देखिए जेम्स सिम्प्सन का हौंसला.

लांस बॉम्बार्डियर जेम्स सिम्प्सन, DOUBLE AMPUTEE Lance Bombardier James Simpson
इमेज कैप्शन, इस सिपाही ने अफगानिस्तान में हुए एक धमाके में अपनी दोनों टांगें गँवा दी थीं लेकिन अब वे लोगों को हौंसला दे रहे हैं. लांस बॉम्बार्डियर जेम्स सिम्प्सन की उम्र 27 साल है और वो बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों की बाधा दौड़ में भाग लेने वाले अपनी तरह के पहले खिलाड़ी बनने जा रहे हैं.
लांस बॉम्बार्डियर जेम्स सिम्प्सन, DOUBLE AMPUTEE Lance Bombardier James Simpson
इमेज कैप्शन, बेहद दुर्गम हालात में होने वाली इस दौड़ को स्पार्टन रेस भी कहा जाता है. यह एक खुली प्रतिस्पर्धा है जिसमें प्रतिभागी को अचानक सामने आ जाने वाली चुनौतियों का सामना करके दौड़ पूरी करनी होती है. इस दौड़ में कीचड़ भरे रास्ते भी होते हैं और आग के घेरे भी.
लांस बॉम्बार्डियर जेम्स सिम्प्सन, DOUBLE AMPUTEE Lance Bombardier James Simpson
इमेज कैप्शन, प्रतिस्पर्द्धा के आयोजकों का कहना है कि इस दौड़ में दिखने वाला जोशोखरोश में आदिम लोगों सरीखा उत्साह महसूस किया जा सकता है. 2009 के नवंबर महीने में लांस बॉम्बार्डियर जेम्स सिम्प्सन अफगानिस्तान के हेलमंड सूबे में एक दिन पैदल गश्त से लौट रहे थे तभी उनके कदम एक आईईडी पर पड़े और तभी एक जोर से धमाका हुआ. सिम्पसन की दोनो टाँगें घुटने के ऊपर से बेकार हो गई और उनके दोनों हाथों को भी इसका नुकसान हुआ.
लांस बॉम्बार्डियर जेम्स सिम्प्सन, DOUBLE AMPUTEE Lance Bombardier James Simpson
इमेज कैप्शन, रॉयल आर्टलरी की पाँचवीं रेजीमेंट का यह सिपाही लीड्स का रहने वाला है और इन दिनों वेस्ट यॉर्कशायर स्थित अपने घर के पास वे स्पार्टन रेस के लिए ट्रेनिंग ले रहे हैं. वे अपने कृत्रिम अंगों के जरिए दौड़ में सामने आ सकने वाली बाधाओं से निपटने की कोशिश कर रहे हैं. वे दौड़ने के काम में आने वाले ब्लेड का सहारा ले रहे हैं. ऐसे ही ब्लेड के सहारे ही पैरा-ओलम्पिक धावक भी दौड़ में भाग लेते हैं.
लांस बॉम्बार्डियर जेम्स सिम्प्सन, DOUBLE AMPUTEE Lance Bombardier James Simpson
इमेज कैप्शन, सिम्पसन कहते हैं, “यह मेरे लिए एक चुनौती साबित होने जा रहा है. यह दौड़ मेरे लिए इतनी बड़ी नहीं है कि मैं इसके लिए परेशान होऊँ लेकिन बाधाओं को तो पार करना है. मैं इन ब्लेड्स की वजह से बहुत छोटे कद का होने जा रहा हूँ. मुझे अपने कंधों और टाँगों पर भरोसा है.”
लांस बॉम्बार्डियर जेम्स सिम्प्सन, DOUBLE AMPUTEE Lance Bombardier James Simpson
इमेज कैप्शन, वह कहते हैं, “मैं चाहता हूँ कि हर कदम मेरा हो. बाधाओं से पार पाने के मामले में मैं अपनी टीम पर निर्भर नहीं होना चाहता. अगर किसी चुनौती को पार पाने में मुझे 10 मिनट या 30 मिनट लगते हैं. मैं हर बाधा खुद पार करना चाहता हूँ.” तीन साल पहले बर्मिंघम के सेली ओक अस्पताल की सैन्य इकाई में पहुँचने के बाद से ही सिम्पसन ये सोचने लगे थे कि वे दोबारा किस तरह से चल पाएंगे.
लांस बॉम्बार्डियर जेम्स सिम्प्सन, DOUBLE AMPUTEE Lance Bombardier James Simpson
इमेज कैप्शन, कृत्रिम अंगों के सहारे चलने में जल्द ही महारत हासिल कर लेने के बावजूद इस साल की शुरुआत में ही उन्होंने तय कि वे दोबारा दौड़ेंगे. उन्होंने कहा, “मेरी पहली चुनौती दौड़ने की नहीं बल्कि चलने की थी.” आठ सितम्बर को रिपन, नॉर्थ यॉर्कशायर के नजदीक यह स्पार्टन दौड़ होनी है. तकरीबन पाँच किलोमीटर के रास्ते में 25 से भी ज्यादा बाधाएँ होंगी. स्पार्टन रेस के प्रमुख कोच माइकल कोहेन सिम्पसन को इन चुनौतियों से निपटने के गुर सिखा रहे हैं. वह कहते हैं, “उनके साथ काम करने का मौका पाकर मैं खुद को खुशी से चाँद पर महसूस कर रहा हूँ. मैंने उन्हें कुछ टिप्स दिए हैं ताकि वे वास्तव में स्पार्टन रेस पूरी कर सकें.”