बीबीसी पाठकों की ये तस्वीरें शहरों और उसके साये में पलने वाली जिंदगियों को बयान करती हैं.
इमेज कैप्शन, बीबीसी अपने पाठकों की भेजी तस्वीरें अक्सर प्रकाशित करता रहता है. इस बार की थीम है 'शहरी जिंदगी'. संदोर डे जेसे ने टोक्यो शहर के भागम-भाग भरी एक शाम की ये तस्वीर भेजी है.
इमेज कैप्शन, डेवलिन स्टेलियन कहते हैं, "क्रिसमस के दौरान बर्मिंघम के एक बाजार में मेरी मुलाकात इस बैंड से हुई थी. वे जिंदादिल लोग थे, उन्हें संगीत से इश्क था. उस वक्त गली में जो माहौल था, मैं उसे अब भी महसूस कर सकता हूँ."
इमेज कैप्शन, एंडी फ्रेंड स्मिथ ने लंदन शहर की ये तस्वीर भेजी है. अपने कैमरे की लेंस में इस तस्वीर को कैद करते वक्त उन्होंने स्पेशल इफेक्ट्स का सहारा लिया था ताकि ये ट्वॉय टाउन सरीखा लगे.
इमेज कैप्शन, एडिन टज़लक कहते हैं कि इस तस्वीर के केंद्र में मौजूद शख्स ब्रेक डांस करते हुए देखा जा सकता है.
इमेज कैप्शन, ज्यूडिथ इविंग कहती हैं, "यह तस्वीर लंदन के मिलेनियम ब्रिज पर 2013 के जून महीने में ली गई थी. मैं पुल पर बैठे कबूतर की तस्वीर लेने की कोशिश कर रही थी तभी मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने क्लिक कर दिया और वह कबूतर उड़ पड़ा. नतीजतन जो तस्वीर बनी वह उम्मीद से ज्यादा रोचक थी."
इमेज कैप्शन, क्रिस्टीना हॉल कहती हैं कि ये तस्वीर ब्रिस्टल शहर की एक सड़क पर बैठी एक लोमड़ी की है.
इमेज कैप्शन, हीरल पटेल कहते हैं, "विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सार्वजनिक परिवहन के तौर पर भूमिगत ट्रेनें शहरी जिंदगी का हिस्सा हो जाती हैं. वे हर जगह एक जैसी ही लगती हैं."
इमेज कैप्शन, इस तस्वीर के बारे में पेटी एडमंड्स कहते हैं, "सफेद लिबास में एक बुजुर्ग आदमी लॉस एंजीलिस के चाइनाटाउन की एक सड़क पर टहल रहा था."
इमेज कैप्शन, इस तस्वीर को भेजने वाले डॉरिस एंडर्स कहते हैं कि वे शहरी जिंदगी से जुड़ से गए हैं.
इमेज कैप्शन, माइल्स स्टोरी कहते हैं कि रात के वक्त टोरंटो शहर में टहलते हुए रोशनी के बक्से सरीखी आकृतियाँ देखी जा सकती हैं जिनकी शीशे की दीवारों के पीछे लोग इकठ्ठे होते हैं. तस्वीर में टोरंटो के डोमिनियन सेंटर टावर की लॉबी दिखाई दे रही है.
इमेज कैप्शन, केविन होर्सवुड ने ये तस्वीर पेरिस के सीन नदी के किनारे बैठे लोगों की ली थी.
इमेज कैप्शन, मारिया चेबीशेवा कहती हैं कि इटली के वेनिस शहर में नहर किनारे बसे एक मकान की ये तस्वीर है. जब भी हम नाश्ता करते थे ये बिल्लियाँ सशंकित हो जाया करती थीं. शुक्र था कि हमारा घर नहर के उस पार था.