जान से खेलेंगे जांबाज़

कंबोडिया की दो नदियों में 70 के दशक में ढेर सारा बारूद डूब गया था. हर साल कई लोग उस बारूद का शिकार बन जाते हैं लेकिन अब उम्मीद की एक किरण जगी है.

कम्बोडिया माइन एक्शन सेंटर में ट्रेनिंग लेते छात्र
इमेज कैप्शन, कंबोडिया में हर साल 100 से भी ज्यादा लोग वहाँ बिछी बारूदी सुरंगों का निशाना बन जाते हैं. पिछले 20 वर्षों से कंबोडिया माइन ऐक्शन सेंटर लोगों को बारूदी सुरंगों को हटाने का प्रशिक्षण दे रहा है.
किनारे पर गोताखोर युनिट.
इमेज कैप्शन, गोल्डेन वेस्ट ह्यूमनिटेरियन फाउंडेशन और कंबोडिया माइन ऐक्शन सेंटर ने 40 स्वयंसेवकों के बीच से गोताखोरों के 14 सुदृढ़ समूह गठित किए हैं. यह कंबोडिया में बारूदी सुरंग हटाने वाली अपने तरह की पहली गोताखोर यूनिट है.
जाल फेंकता हुआ एक मछुआरा
इमेज कैप्शन, 70 के दशक में विस्फोटकों का बड़ा ज़ख़ीरा मेकॉन्ग और तोन्ले सैप नदियों में खमेर रूज़ के लोगों ने डुबा दिया था. आज कल मछुआरे अक्सर जाल से बम को ऊपर खींच ले आते हैं. कबाड़ के भाव में भी उनकी कुछ अहमियत होती है और कुछ लोग इन हथियारों को दोबारा बेचने की कोशिश करते हैं.
ट्रेनिंग के दौरान मास्क पहना हुआ एक गोताखोर.
इमेज कैप्शन, इस परिस्थिति से निपटने के लिए 14 गोताखोरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है. ये न केवल गोता लगाकर विस्फोटक निकालेंगे बल्कि यह काम दिलेरी के साथ करेंगे. प्रशिक्षण के दौरान ये गोताखोर मास्क पहने हुए एक रस्सी से बंधकर नदी में गोता लगाएंगे. गोताखोर रस्सी में लगी गाँठों के ज़रिए पानी की सतह पर मौजूद लोगों से संचार कर सकेंगे.
तलाशी के दौरान एक गोताखोर.
इमेज कैप्शन, ट्रेनिंग में इस्तेमाल किया जाने वाला मास्क काले रंग का है. इसे गहरे रंग में रखे जाने की वजह यह है कि रोशनी किसी भी तरह से इसमें फैल न सके. इस मास्क का मतलब यह हुआ कि तलाशी के वक्त वास्तविक जीवन जैसी परिस्थितियाँ रची जाएँ. ऐसी परिस्थितियाँ जबकि दृश्यता कम हो या न के बराबर हो जाए. गोताखोर के प्रशिक्षण की तरक्की के साथ-साथ गहराई का स्तर भी बढ़ाया जाता है.
गोताखोरी के नोट्स.
इमेज कैप्शन, गोताखोरी के हर अभियान का एक व्यक्ति नेतृत्व कर रहा होता है. उसकी जिम्मेदारी होती है कि वह गोताखोरी के वक्त, ऑक्सीजन के स्तर और तलाशी के तौर तरीकों की निगरानी रखे.
तलाशी करते प्रशिक्षु.
इमेज कैप्शन, त्रि खुन (बाएं) ने कंबोडिया माइन ऐक्शन सेंटर के साथ 1997 में काम करना शुरू किया था. वह कहते हैं, "सिपाही बनने से पहले जब मैं छोटा था तो एक मछुआरे के तौर पर काम करता था. इसलिए पानी के साथ मैं सहज महसूस करता हूँ. मैंने जमीन पर भी विस्फोटकों के साथ काम किया है और इससे जुड़े खतरों को जानता हूँ. मैं जानना चाहता था कि पानी में भी किस तरह के विस्फोटक हो सकते हैं."
प्रशिक्षण के दौरान गोताखोर
इमेज कैप्शन, मेकॉन्ग और तोन्ले सैप दोनों ही नदियों का मिजाज बदलता रहता है. वे अक्सर चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं. 100 फीट की गहराई तक उतरने के लिए शरीर से ताकतवर होने के साथ-साथ मानसिक तौर पर भी मजबूत होना होता है.
एक नकली विस्फोटक जिसे निकाला जाना है.
इमेज कैप्शन, गोताखोर प्रशिक्षक नकली बम रख देते हैं ताकि प्रशिक्षु इसे तलाश सकें. फिलहाल इस टीम का प्रशिक्षण चल रहा है जबकि नदी और उसके किनारों का सर्वे कर लिया गया है. सभी तस्वीरें चार्ल्स फॉक्स