कहानी एक जंग की...

इतिहास हमेशा शब्दों में ही दर्ज नहीं होता. कभी-कभी वह तस्वीरों के ज़रिए भी बोलता है. तस्वीरों में देखिए कोरिया की लड़ाई की कहानी.

उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच 38वें समांतर पर सीमारेखा का फोटो. एएफपी की तस्वीर
इमेज कैप्शन, जून 1950 में जब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय दूसरे विश्व युद्ध से उबर ही रहा था, कोरियाई प्रायद्वीप में एक नया संघर्ष शुरू हो गया. और पहली बार महाशक्तियों में चल रहे शीतयुद्ध में अचानक गर्मी आ गई.
पहाड़ी पर तैनात दक्षिण कोरिया के तीन सैनिक कम्युनिस्ट सेना की गतिविधि पर नज़र रख रहे हैं
इमेज कैप्शन, नॉर्थ कोरिया की कम्युनिस्ट सेना 1945 में तय 38वीं समानांतर सैन्य सीमा रेखा को पार कर दक्षिण की तरफ़ बढ़ी. दक्षिण कोरिया, अमरीका, ब्रिटेन और उनके सहयोगियों ने इसका जवाब दिया.
युद्ध से बचकर भागते कोरियाई शरणार्थी, 19 जून 1951 की तस्वीर, गेटी इमेजेस
इमेज कैप्शन, आंकड़े जुदा हैं, पर कम से कम 20 लाख कोरियाई नागरिक, 15 लाख तक कम्युनिस्ट सैनिक, 30 हज़ार अमरीकी सैनिक, चार लाख दक्षिण कोरियाई सैनिक और क़रीब एक हज़ार ब्रिटिश सैनिक इस युद्ध में मारे गए.
उत्तर कोरिया की आधिकारिक सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी के इस अज्ञात तारीख़ वाले फोटो में, जिसे कोरिया न्यूज़ एजेंसी ने वितरित किया है, उत्तर कोरियाई सैनिक सिओल में टैंक यूनिट के साथ युद्ध में शामिल दिखाई दे रहे हैं.
इमेज कैप्शन, चीन, जापान और सोवियत संघ सालों कोरियाई प्रायद्वीप पर अपने प्रभुत्व की कोशिश करते रहे. जापान ने तो 1910 में कोरिया को उपनिवेश तक बना लिया और दूसरे विश्वयुद्ध के अंत तक वहां शासन किया.
संयुक्त राष्ट्र सेना की एक जीप दिसंबर 1950 में 38वीं समांतर रेखा को पारकर उत्तर कोरियाई राजधानी प्योंगयांग से पीछे हट रही है. एएफपी
इमेज कैप्शन, दूसरे विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण से सिर्फ़ सात दिन पहले सोवियत संघ ने बदलते हालात का फ़ायदा उठाया और कोरिया में प्रवेश कर गया. बाद में सोवियत संघ और अमरीका 38वें अक्षांश पर कोरिया को बांटने के लिए राज़ी हो गए. सोवियत यूनियन को इस रेखा के उत्तरी हिस्से का और अमरीका को दक्षिणी हिस्से पर अधिकार मिला.
जून 1950 के इस फोटो में किम जोंग इल कोरियाई युद्ध के बारे में उत्तर कोरियाई नागरिकों को संबोधित कर रहे हैं. जून 1950 के कोरियाई सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी के इस फोटो कोरिया न्यूज़ सर्विस ने वितरित किया है. एपी
इमेज कैप्शन, सोवियत संघ ने पूर्व छापामार नेता किंम जोंग इल के नेतृत्व में उत्तर में एक कम्युनिस्ट तानाशाही स्थापित की. किम इल सुंग एक पूर्व गुरिल्ला नेता थे.
 अमेरिकी की पहली कैवलरी डिविज़न के सैनिक कोरियाई युद्ध में कोरिया के पूर्वी तट पर पोहान्ग में उतर रहे हैं. जुलाई 1950. एपी
इमेज कैप्शन, 25 जून 1950 की सुबह उत्तर कोरिया ने अचानक 38वीं अक्षांश रेखा को पार कर हमला बोल दिया. तुरंत जापान में मौजूद सैन्य ठिकानों से अमरीकी सेनाएं भेजी गईं. मगर वो और उनके दक्षिण कोरियाई सहयोगी उत्तर कोरिया के साथ संघर्ष की शुरुआत में पस्त हो गए.
हांगकांग के कोलून के हॉल्ट्स व्हार्फ में मिडलसेक्स रेजिमेंट की पहली बटालियन के सैनिक एचएमएस यूनिकॉर्न में सवार होने का इंतज़ार कर रहे हैं. अगस्त 1950. गेटी इमेजेस
इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पास कर सभी सदस्यों से आक्रमण का विरोध करने के लिए मदद मांगी. संयुक्त राष्ट्र के तहत 14 देशों-ऑस्ट्रेलिया, बैल्जियम, कनाडा, कोलंबिया, इथियोपिया, फ्रांस, ग्रीस, नीदरलैंड, न्यूज़ीलैंड, फ़िलीपींस, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड, तुर्की और इंग्लैंड मदद को तैयार हुए.
जनरल डगलस मैकऑर्थर इन्चॉन के नजदीक यूएसएस माउंट मैकिन्ले के फ्लैग ब्रिज से लैंडिंग के पहले की बमबारी और हवाई हमले देखते हुए. 16 सितंबर 1950. एपी
इमेज कैप्शन, जब उत्तर कोरियाई सेना बूसान एन्क्लेव पर वार कर रही थी, इस संघर्ष में संयुक्त राष्ट्र की सेनाओं के प्रमुख अमरीकी जनरल डगलस मैकऑर्थर युद्ध की दिशा पलटने की तैयारी में थे. उन्होंने 15 सितंबर 1950 को पश्चिम तटीय शहर इन्चॉन पर एक साहसी समुद्री हमला बोल दिया.
कोरियाई युद्ध के दौरान 23 सितंबर 1950 को एक अमरीकी मरीन हेलिकॉप्टर बंदरगाह से उतरने में मदद करने वाली नाव से सैनिकों को निकाल रहा है.
इमेज कैप्शन, इन्चॉन के किनारे पर उतरने का मक़सद उत्तर कोरिया की रसद आपूर्ति काटना था. यह योजना जोख़िम भरी थी क्योंकि इसका मतलब था अप्रत्याशित तूफ़ान का सामना और मज़बूत उत्तर कोरियाई सेनाओं के क़ब्ज़े वाले शहर में घुसने की कोशिश. शुरुआती बमबारी के बाद दो बटालियन इन्चॉन में घुस गईं. हालांकि उन्हें किसी जवाबी हमले का सामना नहीं करना पड़ा.
उत्तर कोरिया के प्योंगयांग के नागरिक और दूसरे इलाकों के शरणार्थी 4 दिसंबर 1950 को शहर के पुल को रेंग कर पार करते हुए. ये लोग चीनी कम्युनिस्ट सेनाओं के आक्रमण से बचने के लिए दक्षिण की ओर पलायन कर रहे हैं. एपी
इमेज कैप्शन, मैकऑर्थर 15 अक्टूबर के इस हमले में कामयाबी को लेकर आश्वस्त थे. हालांकि 10 दिन बाद ही सीमा पर जमा हो रही चीनी सेना ने गुपचुप ढंग से मित्र देशों की सेनाओं पर हमला बोल दिया. जनवरी 1951 में अमरीका और उसके सहयोगियों को सियोल के दक्षिण से पीछे हटने को मजबूर होना पड़ा.
अमरीका की फर्स्ट कैवलरी डिविज़न के सैनिक दक्षिण कोरिया में 24वीं डिविज़न के टैंकों की मदद से 18 फरवरी 1951 को दुश्मन के कब्ज़े वाली एक पहाड़ी पर हमले के लिए आगे बढ़ते हुए. एपी
इमेज कैप्शन, दक्षिण कोरिया के अपेक्षाकृत खुले इलाक़ों में संयुक्त राष्ट्र की सेनाएं अपना बचाव करने में ज़्यादा सक्षम थीं. कुछ और महीनों की लड़ाई के बाद मोर्चा आखिरकार 38वीं अक्षांश रेखा के इलाक़े में आकर जम गया.
मित्र राष्ट्रों के वाहन 25 जुलाई 1951 को कम्युनिस्ट वार्ताकारों से बातचीत के बाद वापस आ रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र युद्धविराम कैम्प के पास मशीन गन के साथ सैनिक चौकस हैं. एपी
इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति ट्रूमैन ने एलान किया कि संयुक्त राष्ट्र अब युद्धविराम पर हस्ताक्षर को तैयार है. युद्धविराम के लिए 10 जुलाई 1951 को बातचीत शुरू हुई, लेकिन इस पर सहमति बनी रही कि दुश्मनी जारी रहेगी.
अमरीकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइज़नहॉवर और उनकी पत्नी मैमी 20 जनवरी 1953 को शपथग्रहण समारोह से पहले एक खुली कार से दर्शकों का अभिवादन करते हुए.
इमेज कैप्शन, युद्ध की खुले तौर पर आलोचना करने वाले ड्वाइट आइज़नहॉवर जनवरी 1953 में ट्रूमैन की जगह अमरीका के राष्ट्रपति बने. आइज़नहॉवर ने कहा कि वो संघर्ष ख़त्म करने के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने को तैयार हैं.
 अमरीकन लेफ्टिनेंट जनरल मार्क क्लार्क (1896-1984) दक्षिण कोरिया में 27 जुलाई 1953 को कोरियाई संधि पर हस्ताक्षर करते हुए. एपी.
इमेज कैप्शन, 27 जुलाई 1953 को एक संधि पर हस्ताक्षर हुए. उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच मोर्चाबंदी को नई सरहद के तौर पर मंज़ूरी मिल गई.
 जॉर्जिया के अटलांटा के बिली जे बुकानन 'ऑपरेशन बिग स्विच के दूसरे दिन' 6 अगस्त 1953 को संयुक्त राष्ट्र के एक युद्धबंदी अदला-बदली स्थान पर. एपी
इमेज कैप्शन, इसके बाद ऑपरेशन बिग स्विच चला, जिसके तहत दोनों पक्षों के हज़ारों युद्धबंदियों को लौटाया गया. युद्धविराम संधि का मक़सद अस्थायी था. इसमें कहा गया था कि इसका मक़सद 'तब तक के लिए युद्धविराम है, जब तक शांतिपूर्ण निपटारा नहीं हो जाता.'
दक्षिण कोरिया के सैनिक 23 अप्रैल 2013 को दक्षिण और उत्तर कोरिया के बीच सरहद के असैनिक क्षेत्र के गांव पनमुन्जोम में. गेटी इमेजेस
इमेज कैप्शन, विवाद का शांतिपूर्ण निपटारा कभी नहीं हो सका. 1954 के जेनेवा समझौतों में कोरियाई प्रायद्वीप पर चर्चा हुई थी, लेकिन मसले का हल नहीं हो सका और कोरियाई सीमा तब से बनी हुई है.