कल चमन था, अब उजड़ा दयार

उत्तराखंड की बाढ़ के गुजर जाने के बाद वहाँ हर तरफ बर्बादी के निशान देखे जा सकते हैं. धारचुला और उसके आस पास के इलाकों का भी हाल भी कुछ ऐसा ही है.

उत्तराखंड बाढ़ प्रभावित क्षेत्र
इमेज कैप्शन, उत्तराखंड में एक महीने पहले आई बाढ़ से हुई बर्बादी के निशान हर तरफ दिखाई देते हैं. पिथौरागढ़ से धारचूला की ओर तवाघाट टनकपुर राष्‍ट्रीय राज्‍य मार्ग मे स्थित बलुवाकोट मे गिरते हुए मकान.
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इमेज कैप्शन, धारचूला के गाँव बेहद दुर्गम इलाकों मे हैं जो आज भी मुख्यधारा से कटे हुए हैं. आपदा प्रभावित गाँवों को रसद आपूर्ति के लिए इसके अलावा कोई चारा नही हैं.
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इमेज कैप्शन, भारत और नेपाल की सीमा पर स्थित झूला पुल. ये पुल भारत के धारचूला को नेपाल के दारचूला से जोड़ता है. इस समय भारत और नेपाल को जोड़ने का एकमात्र रास्ता यही है.
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इमेज कैप्शन, नेपाल के दारचूला में भी तबाही मची थी जिसमें नदी किनारे तमाम मकान बह गए.
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इमेज कैप्शन, चार गांव इस प्राक़तिक आपदा मे पूरी तरह से बह गए. इनमें सबसे पहले बहने वाला गाँव था शोबला. (फोटो साभारः शालू दताल)
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इमेज कैप्शन, तबाही के बाद शोबला गाँव की हालत इस तस्वीर से समझी जा सकती है. (फोटो साभारः शालू दताल)
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इमेज कैप्शन, यही हाल सुवा गाँव का हुआ जो कि धौली गंगा नदी की भेंट चढ़ गया. (फोटो साभारः शालू दताल)
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इमेज कैप्शन, बाढ़ के बाद सुवा गाँव का दृश्य. (फोटो साभारः शालू दताल)
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इमेज कैप्शन, ये रास्‍ता पिथौरागढ़ से धारचुला जाया करता था परंतु अब यह भारी भूस्‍खलन के चलते टूट चुका है. इस रास्‍ते को खुलने मे 25 दिन लगे.
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इमेज कैप्शन, भारत के धारचुला के एक स्‍कूल मे बना राहत शिविर. यहाँ लगभग 100 से ज्‍यादा परिवार रह रहे हैं.
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इमेज कैप्शन, सीमा सड़क संगठन ने नए रास्‍ते बनाने के लिए जगह जगह जेसीबी मशीनें लगाई हैं.