रूसी साम्राज्य रंगीन तस्वीरों में

रूसी अभिजात वर्ग के सर्गेई मिखाइलोविच प्रोकुदिन-गोर्स्की ने 1909 से 1912 ने खुद तैयार की गई तकनीक के सहारे ये दिलकश तस्वीरें खींची थी. उन्हें रूसी साम्राज्य में घूम-घूम कर तस्वीरें खींचने की विशेष अनुमति देश के सम्राट ज़ार निकोलस द्वितीय ने दी थी.

ये रंगीन तस्वीर सौ वर्ष पुरानी है. ये रूसी अभिजात वर्ग के सर्गेई मिखाइलोविच प्रोकुदिन-गोर्स्की का चित्र है. इसके लिए उन्होंने स्वयं तैयारी की एक तकनीक का इस्तेमाल किया है. प्रोकुदिन-गोर्स्की ने प्रियोडिक टेबल का जनक मेंडेलीव से रसायन-शास्त्र की शिक्षा ली थी. बाद में उन्होंने बर्लिन में फ़ोटो-कैमिस्ट्री का अध्ययन किया.
इमेज कैप्शन, ये रंगीन तस्वीर सौ वर्ष पुरानी है. ये रूसी अभिजात वर्ग के सर्गेई मिखाइलोविच प्रोकुदिन-गोर्स्की का चित्र है. इसके लिए उन्होंने स्वयं तैयारी की एक तकनीक का इस्तेमाल किया है. प्रोकुदिन-गोर्स्की ने प्रियोडिक टेबल का जनक मेंडेलीव से रसायन-शास्त्र की शिक्षा ली थी. बाद में उन्होंने बर्लिन में फ़ोटो-कैमिस्ट्री का अध्ययन किया.
प्रोकुदिन-गोर्स्की ने 1909-1912 के बीच रूसी साम्राज्य में घूम-घूम कर सैकड़ों तस्वीरें खींची. इस काम के लिए उन्हें रूसी सम्राट ज़ार निकोलस द्वितीय ने विशेष अनुमति दी थी.
इमेज कैप्शन, प्रोकुदिन-गोर्स्की ने 1909-1912 के बीच रूसी साम्राज्य में घूम-घूम कर सैकड़ों तस्वीरें खींची. इस काम के लिए उन्हें रूसी सम्राट ज़ार निकोलस द्वितीय ने विशेष अनुमति दी थी.
उन्होंने रूस से उत्तर से लेकर अफ़गानिस्तान तक यात्राएं कीं. यहां ( भूरे रंग की जैकेट में ) वे एक गांव में घोड़ागाड़ी की सवारी कर रहे हैं.
इमेज कैप्शन, उन्होंने रूस से उत्तर से लेकर अफ़गानिस्तान तक यात्राएं कीं. यहां ( भूरे रंग की जैकेट में ) वे एक गांव में घोड़ागाड़ी की सवारी कर रहे हैं.
उनके काम में आधुनिक काल में प्रवेश करते रूस की तस्वीर उभरती है. दरअसल इन तस्वीरों के लिए प्रोकुदिन-गोर्स्की एक ट्रेन के कैबिन को डार्क-रूम के तौर पर इस्तेमाल करते थे.
इमेज कैप्शन, उनके काम में आधुनिक काल में प्रवेश करते रूस की तस्वीर उभरती है. दरअसल इन तस्वीरों के लिए प्रोकुदिन-गोर्स्की एक ट्रेन के कैबिन को डार्क-रूम के तौर पर इस्तेमाल करते थे.
वो हर तस्वीर को तीन कांच की प्लेटों पर उतारते थे. लाल, नीली और हरी कांच की प्लेटों पर तीन तस्वीरें उतारने के बाद उन्हें एक साथ मिलाया जाता था.
इमेज कैप्शन, वो हर तस्वीर को तीन कांच की प्लेटों पर उतारते थे. लाल, नीली और हरी कांच की प्लेटों पर तीन तस्वीरें उतारने के बाद उन्हें एक साथ मिलाया जाता था.
ये उच्चकोटि की तस्वीरें एक ऐसी दुनिया को दिखाती हैं जो अब तक छिपी रही है. ये वोल्गा नदी पर शेक्सना नाम के जहाज़ के कर्मचारी हैं.
इमेज कैप्शन, ये उच्चकोटि की तस्वीरें एक ऐसी दुनिया को दिखाती हैं जो अब तक छिपी रही है. ये वोल्गा नदी पर शेक्सना नाम के जहाज़ के कर्मचारी हैं.
ये लोग जॉर्जिया में चाय के बागान में काम कर रहे हैं. ये दरअसल ग्रीस से आए लोग हैं जो उस समय काफ़ी संख्या में बागानों में काम करते थे लेकिन मौजूदा समय में वे इस इलाके से गायब हो गए हैं.
इमेज कैप्शन, ये लोग जॉर्जिया में चाय के बागान में काम कर रहे हैं. ये दरअसल ग्रीस से आए लोग हैं जो उस समय काफ़ी संख्या में बागानों में काम करते थे लेकिन मौजूदा समय में वे इस इलाके से गायब हो गए हैं.
ये समरकंद है. इस इलाके वे रूसी सेनाओं की जीत के तुरंत बाद पहुंचे थे.
इमेज कैप्शन, ये समरकंद है. इस इलाके वे रूसी सेनाओं की जीत के तुरंत बाद पहुंचे थे.
ये है समरकंद का बाज़ार.
इमेज कैप्शन, ये है समरकंद का बाज़ार.
जल्द ही प्रोकुदिन-गोर्स्की के तस्वीरों में दिखने वाले लोग पहले विश्व युद्ध में लड़ने वाले थे. कई उसके बाद रूसी क्रांति में हिस्सा लेने वाले थे और सोवियत संघ का हिस्सा होने वाले थे.
इमेज कैप्शन, जल्द ही प्रोकुदिन-गोर्स्की के तस्वीरों में दिखने वाले लोग पहले विश्व युद्ध में लड़ने वाले थे. कई उसके बाद रूसी क्रांति में हिस्सा लेने वाले थे और सोवियत संघ का हिस्सा होने वाले थे.
ये दो लोग एक सर्कस के लिए टिकट बेच रहे हैं. पीछे पोस्टर पर घुड़सवारी के खेल का विज्ञापन है.
इमेज कैप्शन, ये दो लोग एक सर्कस के लिए टिकट बेच रहे हैं. पीछे पोस्टर पर घुड़सवारी के खेल का विज्ञापन है.
प्रोकुदिन-गोर्स्की साल 1918 में रूस से चले गए थे. नोर्वे और ब्रिटेन में रहने के बाद वे फ़्रांस में बस गए. उनके परिवार ने उनकी ये तस्वीरें पेरिस के घर की तहखाने में सुरक्षित रखी थीं. बाद में इन्हें यूएस लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस को बेच दिया गया. सभी तस्वीरें – लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस, प्रिंट्स और फ़ोटोग्राफ़्स डिविज़न, प्रोकुदिन-गोर्स्की संकलन
इमेज कैप्शन, प्रोकुदिन-गोर्स्की साल 1918 में रूस से चले गए थे. नोर्वे और ब्रिटेन में रहने के बाद वे फ़्रांस में बस गए. उनके परिवार ने उनकी ये तस्वीरें पेरिस के घर की तहखाने में सुरक्षित रखी थीं. बाद में इन्हें यूएस लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस को बेच दिया गया. सभी तस्वीरें – लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस, प्रिंट्स और फ़ोटोग्राफ़्स डिविज़न, प्रोकुदिन-गोर्स्की संकलन