दिल्ली जो एक शहर था...

1911 में कैसे सजा दिल्ली दरबार और अंग्रेज़ प्रशासित भारत की राजधानी बनी नई दिल्ली.

दिल्ली के पुराने चित्र
इमेज कैप्शन, दिल्ली का पहला ज़िक्र महाभारत में मिलता है जहां 'इंदरपथ' यानी इंद्रप्रस्थ के रुप में पांडवों पहली बार दिल्ली को बसाया. माना जाता है कि उस जगह आज पुराने किले के खंडहर हैं. नीली छतरी और दिल्ली में मौजूद निगमबोध सहित प्राचीन दिल्ली की ये तीन निशानियां आज भी मौजूद हैं. इस बाबत ये दिल्ली लगभग तीन-साढ़े तीन हज़ार साल पुराना शहर है. ये है लाल किले का एक प्राचीन चित्र जिसमें एक छोर पर नीली छतरी का गुम्बद भी नज़र आ रहा है.
तुग़लकाबाद का किला
इमेज कैप्शन, दिल्ली पर कई शासकों का राज रहा और हर बादशाह ने पुराने शहर को उजाड़ कर इसे नए सिरे से बसाया. दिल्ली स्थित तुग़लकाबाद में 1321 से 1325 ईसवी के बीच बनाया गया घियासुद्दीन तुग़लक का मक़बरा. कहते हैं घियासुद्दीन ने सुनहरी इंटों से इस शहर को बनवाया और किले की ख़ूबसूरती की तारीफ़ के लिए हर किसी को दरबार में पहुंचने का फ़रमान जारी किया.
तुग़लकाबाद का किला
इमेज कैप्शन, हज़रत निज़ामुद्दान औलिया ने जब घियासुद्दीन तुग़लक के इस फ़रमान को नहीं माना तो उन्हें कड़ी यातनाएं दी गईं. जवाब में हज़रत निजामुद्दीन ने कहा कि तुग़लकाबाद का ये किला दिल्ली से दूर खंडहर रहेगा. तुग़लकाबाद जल्द ही वीरान हो गया और इसके नज़दीक आज केवल एक छोटी सी बस्ती है.
दिल्ली के पुराने चित्र
इमेज कैप्शन, ये तस्वीर है आखिरी मुग़ल बादशाह बहादुरशाह जफ़र की. 1857 की क्रांति के बाद दिल्ली पर पूरी तरह अंग्रेज़ों का कब्ज़ा हो गया और उनके सभी बेटे अंग्रेज़ों के हाथों मारे गए. बहादुरशाह जफ़र अपनी ज़िंदगी के आखिरी दिन रंगून में बिताने को मजबूर हुए.
दिल्ली के पुराने चित्र
इमेज कैप्शन, 1857 के विद्रोह में शामिल होने की दिल्ली को खासी सज़ा मिली. शहर से लोगों को खदेड़ दिया गया और दिल्ली की दीवार ढहा दी गई. ये दिल्ली के पतन का दौर था जब यहां न व्यापार था, न राजनीतिक स्थिरता. सड़कें खाली हो गईं और गांव सूने.
दिल्ली के पुराने चित्र
इमेज कैप्शन, दिल्ली के सात शहरों में से एक शाहजहानाबाद को मुग़ल बादशाह शाहजहां ने 17वीं शताब्दी के मध्य में बसाया. कहते हैं ये शहर शाहजहां का सपना था और इस शहर की नींव रखते समय शाहजहां ने ज़मीन पर सोने-चांदी के सिक्के और बेशकीमती जवाहारात बिखेरे.
दिल्ली के पुराने चित्र
इमेज कैप्शन, लाल किले के साए में बसे शाहजहानाबाद में चांदनी चौक को दर्शाता एक चित्र. कभी चांदनी चौक के बीचों-बीच एक नहर बहती थी जो इस शहर के लोगों के लिए पानी का ज़रिया थी.
दिल्ली दरबार
इमेज कैप्शन, मुग़लों के पतन के बाद दिल्ली पर अंग्रेज़ों का कब्ज़ा हुआ और 1911में ब्रिटेन के महाराजा जॉर्ज पंचम के राज्याभिषेक के लिए दिल्ली में एक दरबार सजाया गया. दरबार के लिए दिल्ली के एक सुदूर इलाके बुराड़ी को चुना गया जो आज शहर का हिस्सा है. इसी भव्य आयोजन का एक चित्र.
दिल्ली दरबार
इमेज कैप्शन, इस मौके पर भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित किए जाने का फैसला अंत समय तक गोपनीय रखा गया. 12 दिसंबर 1911को किंग जॉर्ज पंचम ने जब हज़ारों लोगों की भीड़ के सामने अचानक ये घोषणा की तो सभा में सन्नाटा छा गया.
दिल्ली दरबार
इमेज कैप्शन, दिल्ली दरबार के लिए बुराड़ी की ओर प्रस्थान करते अधिकारियों और सैन्य दलों का काफ़िला. इससे पहले 1877 और 1903 में भी दिल्ली दरबार आयोजित हो चुके थे, लेकिन 1911 का ये आयोजन इतना भव्य और योजनाबद्ध था कि ब्रितानी सरकार ने इस आयोजन पर 1000 पन्नों की एक विशिष्ट किताब प्रकाशित की.
दिल्ली दरबार
इमेज कैप्शन, दिल्ली दरबार के आयोजन के लिए लगभग 20,000 कामगारों की मदद ली गई. अतिथियों और इन लोगों रहने के लिए हज़ारों की संख्या में शिविर लगाए गए. दिल्ली दरबार की अपनी रेलवे व्यवस्था थी और शाही जोड़ा जिस शिविर में ठहरा उससे सभागार तक आने के लिए एक अलग रेलवे लाइन बिछाई गई.
दिल्ली दरबार
इमेज कैप्शन, आयोजन इतना भव्य और महत्वपूर्ण था कि दरबार के दौरान ख़बरें, प्रचार सामग्री और प्रशासनिक दस्तावेज़ प्रकाशित करने के लिए अलग से छापा-खाना लगाया गया.
दिल्ली दरबार
इमेज कैप्शन, 15 दिसंबर 1911 को पुरानी दिल्ली के पास नई दिल्ली की नींव रखी गई लेकिन बाद में एडवर्ड लुटियन्स ने नई दिल्ली बसाने के लिए रायसीना हिल को चुना. कहते हैं भारतीय ठेकेदार सोभा सिंह ने अपनी साइकिल पर नींव का पत्थर लादकर रातों रात उसे रायसीना हिल स्थानांतरित किया था.
पुरानी दिल्ली
इमेज कैप्शन, 1911 की घोषणा के बाद नई दिल्ली का उदघाटन 1931 में हुआ, लेकिन कई बरस तक ये नया शहर रात होते ही वीरान हो जाता था. नई दिल्ली में बने दफ़्तरों में काम के बाद सरकारी कार्मचारी पुरानी दिल्ली के अपने घरों में लौट आते थे.
बुराड़ी स्थित कॉरोनेश पार्क
इमेज कैप्शन, दिल्ली के बुराड़ी इलाके में आज भी वो कॉरोनेशन पार्क मौजूद है जहां नई दिल्ली की नींव रखी गई. शिलान्यास को दर्शाता एक ताज़ा चित्र.
बुराड़ी स्थित कॉरोनेश पार्क
इमेज कैप्शन, कॉरोनेशन पार्क में मौजूद किंग जॉर्ज पंचम की भव्य मूर्ति. माना जाता है कि स्वतंत्रता आंदोलन की सुगबुगाहट के बीच भारत की जनता से सीधा रिश्ता कायम करने के लिए किंग जॉर्ज पंचम ने दिल्ली दरबार सजाया.
बुराड़ी स्थित कॉरोनेश पार्क
इमेज कैप्शन, जॉर्ज पंचम की मूर्ति की एक निकट तस्वीर. इतिहास के गवाह रहे इस स्थल को आज़ादी के बाद भुला दिया गया. ब्रितानी शासन की बीती शान की निशानी के रुप में इस पार्क में आज भी अंग्रेज़ों की कुछ आधी-अधूरी मूर्तियां मौजूद हैं जिनकी शान अब फीकी पड़ चुकी है.