इराक़ की कहानी, तस्वीरों की ज़ुबानी

अगस्त 2010 में इराक़ में अमरीकी लड़ाकू अभियान समाप्त हो गया है. तस्वीरों में क़ैद इस लड़ाकू अभियान के इतिहास की एक झलक.

इराक़ की तस्वीर
इमेज कैप्शन, 17 मार्च, 2003, अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने सद्दाम हुसैन और उनके बेटे को इराक़ छोड़ने के लिए 48 घंटे की मोहलत दी थी. बस दो दिन बाद बग़दाद में हुआ पहला हवाई हमला. (फ़ोटो-एएफ़पी)
बसरा से आए शरणार्थी
इमेज कैप्शन, बसरा से शरणार्थी दक्षिणी इराक़ की ओर बढ़ने लगे. 22 मार्च 2003 तक पूरा शहर ब्रितानी सेनाओं से घिर गया था. बसरा से आए शरणार्थियों के लिए चिंता तब गहरी हुई जब शहर में ज़रूरत की सभी चीज़ें, यहाँ तक कि पानी की आपूर्ति भी रोक दी गई. (फ़ोटो-एपी)
इराक़ में तूफ़ान
इमेज कैप्शन, जैसे ही अमरीकी नेतृत्व में सेनाएं उत्तर की ओर बढ़ने लगीं, 25 मार्च को आंधी-तूफ़ान आया जिससे सेना की रफ़्तार धीमी हो गई. इस बीच बग़दाद के दक्षिणी हिस्से में पहले से चिन्हित निशानों पर हवाई हमले और बमबारी जारी रहे. (फ़ोटो-एएफ़पी)
सद्दाम की मूर्ति गिराई
इमेज कैप्शन, कई हफ़्तों तक चले युद्ध के बाद, अमरीकी सेनाएँ मध्य बग़दाद पहुँच गईं. नौ अप्रैल को अमरीकी सिपाहियों ने सद्दाम हुसैन की मूर्ति को गिरा दिया. इसे एक प्रतीक के रुप में देखा गया. लेकिन सद्दाम हुसैन बाहरी दुनिया से छिपते रहे. (फ़ोटो- रॉयटर्स)
इराक़ में विमान पर जॉर्ज बुश का भाषण
इमेज कैप्शन, पहली मई, 2003, राष्ट्रपति बुश ने यूएसएस इब्राहिम लिंकन युद्धपोत की छत पर खड़े होकर भाषण दिया. विमान पर लगे बैनर पर लिखा था 'मिशन पूरा हुआ'. इसी समय उन्होंने ऐलान किया था कि इराक़ में सैन्य कार्रवाई पूरी हुई. (फ़ोटो-एपी)
अमरीकी सेना ने सद्दाम को पकड़ा
इमेज कैप्शन, दिसंबर 2003, इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को अमरीकी सेनाओं ने उनके गृह नगर तिकरित के पास एक बंकर में ढूंढ निकाला. (फ़ोटो- गैटी इमेजज़)
इराक़ी तेल पाइप लाइन पर हमला
इमेज कैप्शन, विद्रोहियों के निशाने पर इराक़ की तेल पाइप लाइन.
इराक़ी सेना भर्ती केंद्र
इमेज कैप्शन, वर्ष 2004 में पूरे साल इराक़ के सुन्नी और शिया समुदायों के बीच तनाव बढ़ने लगा. मानव बमों के ज़रिए हमले होन लगे. ये तस्वीर बग़दाद में इराक़ी सेना भर्ती केंद्र पर हुए धमाके की है. (फ़ोटो-एपी)
फ़लूजा में अमरीकी सैनिक
इमेज कैप्शन, 31 मार्च 2004, फ़लूजा में चरमपंथियों ने अमरीकी सैनिकों पर हमला किया. कुछ दिनों बाद, अप्रैल में अमरीकी सेना ने शहर पर हमला कर दिया. उसके बाद नवंबर के महीने में दोबारा हमला किया जिसमें लगभग एक हज़ार चरमपंथी मारे गए. (फ़ोटो-एपी)
अबूग़रैब जेल
इमेज कैप्शन, मई 2004, बग़दाद की अबूग़रैब जेल. अमरीकी फ़ौजियों की तरफ़ से हिरासत में लिए गए इराक़ियों पर अत्याचार के सबूत तस्वीरों के रूप में सामने आए. इस घटना के बाद अमरीकी सेना की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े होने लगे. 11 जवानों को जेल भी हुई. (फ़ोटो-एपी)
इराक़ी बच्चा
इमेज कैप्शन, बेकसूर इराक़ियों पर हमले होने से इराक़ के नागरिकों और गठबंधन वाली सेनाओं के बीच संबंध ख़राब होने लगे. इस तस्वीर में छुपी है एक ऐसे बच्चे की चीख़, जिसके माता-पिता की गाड़ी पर अमरीकी सेना ने गोलीबारी की थी. (फ़ोटो- गैटी इमेजज़)
हथियारों का ख़तरा
इमेज कैप्शन, अमरीकी नेतृत्व को आशंका थी कि इराक़ी सेनाएँ रसायनिक या जैविक हथियारों का इस्तेमाल कर सकती हैं. लेकिन अक्तूबर 2004 में संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख इंस्पेक्टर ने पाया कि इराक़ के पास रसायनिक, जैविक या फिर परमाणु हथियार नहीं हैं. (फ़ोटो-एपी)
ग़ुस्साए इराक़ियों का हमला
इमेज कैप्शन, 19 सितंबर 2005, बसरा में लोगों ने ग़ुस्से में ब्रितानी टैंकों पर पेट्रोल बम और पत्थरों से हमला कर दिया. इसकी वजह थी इराक़ी प्रशासन का बयान कि उन्होंने दो ब्रितानी जवानों को पुलिस पर गोलीबारी करने के आरोप में हिरासत में लिया है. (फ़ोटो- रॉयटर्स)
इराक़ में पहला मतदान
इमेज कैप्शन, 15 दिसंबर 2005, इराक़ी नागरिकों ने अमरीकी नेतृत्व में हुए हमले के बाद से पहली बार ऐसी सरकार के लिए मतदान किया जो अपना कार्यकाल पूरा कर सकती थी. चार महीने बाद अप्रैल 2006 में नूरी अल-मलिकी ने नई सरकार का गठन किया. (फ़ोटो- गैटी इमेजज़)
धार्मिक स्थल निशाने पर
इमेज कैप्शन, फ़रवरी 2006 में एक बम विस्फोट से समारा में सुनहरी मस्जिद तबाह हो गई. ये शिया समुदाय का पवित्र स्थान था. इस विस्फोट के बाद धर्म के नाम पर हिंसा की लहर दौड़ गई जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए. (फ़ोटो-एपी)
सद्दाम को हुई सज़ा
इमेज कैप्शन, 19 अक्तूबर 2005, सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ 1982 में दुजेल में मारे गए 140 लोगों की मौत को लेकर अमानवीय अपराधों के लिए कार्रवाई शुरू हुई. पाँच नवंबर 2006 को सद्दाम हुसैन को फांसी की सज़ा सुनाई गई और 30 दिसंबर को उन्हें फांसी दे दी गई. (फ़ोटो- गैटी इमेजज़)
इराक़ का इतिहास
इमेज कैप्शन, वर्ष 2006 में अमरीकी फ़ौजियों ने सुन्नी समुदाय के उन लोगों को ढूंढना शुरु किया जिन्हें इराक़ में अल-क़ायदा से हमदर्दी हुआ करती थी. अमरीका की मदद से सुन्नी जागृति समिति का गठन हुआ. इस समिति के गठन से युद्ध में एक नया मोड़ आया. (फ़ोटो-एपी)
ब्रितानी सेना निकल गई
इमेज कैप्शन, सितंबर 2007 में ब्रितानी सेनाओं ने अपना अड्डा बसरा में शहर से हटाकर हवाईअड्डे में स्थानांतरित कर लिया. उन्होंने दक्षिणी इराक़ में सैन्य अभियान ख़त्म कर दिया और मार्च 2009 में सब कुछ अमरीकी सेना के सुपुर्द कर दिया गया. (फ़ोटो- गैटी इमेजज़)
अमरीकी सैनिकों का आख़िरी सलाम
इमेज कैप्शन, अमरीकी लड़ाकू सेनाओं का आख़िरी समूह अगस्त 2010 में इराक़ छोड़कर चला गया. लेकिन अभी भी वो हज़ारों सैनिक इराक़ में मौजूद हैं जो सैन्य अभियान में शामिल नहीं हैं. (फ़ोटो-एपी)