किसी भारतीय भाषा में पहला नॉवेल लिखने वाली ग़ुमनाम महिला कौन?
परसा वाली, पप्पू की दुल्हन, आशीष की मम्मी...ये सुनते-सुनते और इस पहचान के साथ जीती महिलाएं अपना असली नाम भी भूल जाती हैं. लेकिन क्या महिलाओं को खुद के नाम से पहचाने जाने की तड़प नहीं है और उनकी इस तड़प पर उनका समाज सदियों से क्या प्रतिक्रिया देता रहा है? बिहार की महिलाओं के ज़रिए बुनी इस कहानी को देखिए जिसमें आपको भारत की पहली महिला उपन्यासकार का नाम भी गूंजता सुनाई देगा...
स्टोरी: सीटू तिवारी, बीबीसी के लिए
कैमरा: विष्णु नारायण, बीबीसी के लिए
एडिटिंग: सदफ़ ख़ान
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