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भारत के दो दिग्गज जासूसों की कहानी- विवेचना
आमतौर से ख़ुफ़िया एजेंसी के प्रमुख अपनी आत्मकथा लिखने से कतराते हैं और अगर लिखते भी हैं तो अपने साथियों का खुलेआम ज़िक्र करने से परहेज़ कर जाते हैं. रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख रहे अमरजीत सिंह दुलत की हाल में प्रकाशित आत्मकथा 'अ लाइफ़ इन द शैडोज़ अ मेमॉएर' इस मामले में अपवाद है.
इस किताब में उन्होंने अपने बॉस रहे एम.के. नारायणनन और अपने जूनियर रहे अजीत डोभाल की कार्यशैली पर अपनी बेबाक राय प्रकट की है.
वीडियो: रेहान फ़ज़ल/देबलिन रॉय
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