आशा पारेख के सफ़र की कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी
'अगर कोई मेरे से पूछे तो मैं अगले जन्म में भी आशा पारेख ही बनना चाहूंगी...'
दादा साहेब फाल्के अवार्ड जीतने वाली आशा पारेख से जब उनके सफ़र के बारे में पूछा तो वो ये कहती हैं.
आशा पारेख ने बताया कि उनके जमाने में अभिनेत्रियों के लिए वैनिटी वैन तो दूर टॉयलेट तक नहीं होते थे. शूट के दौरान कपड़े बदलने के लिए भी काफ़ी संघर्ष करना पड़ता था. अपने पूरे सफ़र के बारे में आशा पारेख ने क्या-क्या कहा?
रिपोर्ट: वंदना, टीवी एडिटर, बीबीसी इंडिया
शूट: केंज उल मुनीर और जमशेद अली
एडिटिंग: केंज उल मुनीर
गेस्ट कोर्डिनेटर: संगीता यादव
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