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पश्चिम बंगाल: बीजेपी के मार्च में कार्यकर्ताओं और पुलिस की झड़प, कई घायल
बीजेपी के नबान्न मार्च के दौरान कई जगहों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हुई है.
पुलिस की गाड़ी में भी आग लगाने की घटना सामने आई है. वहीं दूसरी ओर अभियान के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है.
बीजेपी के 'नबान्न चलो' मार्च के दौरान हुए हंगामे पर सवाल उठाते हुए तृणमूल कांग्रेस ने पूछा है कि ये बीजेपी कार्यकर्ता हैं या कोई हुड़दंगी?
ट्विटर पर मार्च का एक वीडियो शेयर करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी ने लिखा, ''सरकारी संपत्ति को नष्ट करना और नुक़सान पहुंचाना, पुलिसकर्मियों पर हमला करना, अराजकता पैदा करना और राज्य भर में शांति भंग करना - बीजेपी की आज की गतिविधियां जिसने पूरे देश को शर्मसार कर दिया.''
''हम इस तरह के अपमानजनक व्यवहार की कड़ी निंदा करते हैं!''
नबान्न मार्च के पीछे बीजेपी का तर्क
वहीं बंगाल बीजेपी ने वॉटर कैनन और पुलिस की कार्रवाई को बर्बर बताते हुए लिखा, ''पुलिस की बर्बरता और वॉटर कैनन को नज़रअंदाज़ करते हुए बीजेपी भ्रष्टाचार के विरोध में कोलकाता की सड़कों पर उतरी है.''
वहीं दूसरे ट्वीट में पार्टी लिखती है, ''भ्रष्टाचारी सरकार की अब और ज़रूरत नहीं.''
सड़क पर बड़ी तादाद में इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों को अलग-थलग करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया था.
प्रदर्शनकारियों पर मार्च के दौरान पत्थरबाज़ी और हंगामा करने के आरोप हैं.
इस दौरान पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष सुकांता मजूमदार, विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी और लॉकेट चटर्जी समेत बीजेपी के कई बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था. बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया.
रिहाई के तुरंत बाद समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए अधिकारी ने कहा, '' कई बीजेपी कार्यकर्ताओं के हाथ पैर टूट गए हैं, 200 से ज़्यादा कार्यकर्ता घायल हैं. हम इसके ख़िलाफ़ लड़ेंगे. बीजेपी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी और पार्टी की अगली रणनीति के बारे में बताएगी. ''
बीजेपी का नबान्न अभियान
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में मंगलवार को भाजपा के नबान्न यानी राज्य सचिवालय अभियान को ध्यान में रखते हुए सचिवालय और उसके आसपास पांच किलोमीटर का दायरा पुलिस छावनी में बदल गया है.
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