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दीप्ति नवल ने अपने बचपन, फ़िल्में और देश के मौजूदा हालात पर क्या-क्या कहा?
दिल्ली की उस वक़्त की सादगी भरी ज़िंदगी और उसमें सादगी भरी एक लड़की जो सेल्सगर्ल है और घर घर जाकर चमको नाम का वाशिंग पाउडर बेचती है.
फ़िल्म चश्मे बद्दूर जब 1981 में रिलीज़ हुई तो दुनिया ने ठीक से दीप्ति नवल नाम की एक नई अभिनेत्री को जाना जो गर्ल नेक्सट डोर की छवि के साथ फ़िल्मों में आई.लेकिन कथा, अंगूर, साथ-साथ, किसी से न कहना जैसी फ़िल्मों की इस अभिनेत्री ने जल्द ही गर्ल नेक्सट डोर वाली छवि छोड़ किरदारों की एक नई दुनिया बसाई.
लेकिन फ़िल्मी दुनिया के इन किरदारों से दूर दीप्ति नवल ने अपनी ज़िंदगी पर एक किताब लिखी है- अ कंट्री कॉल्ड चाइल्डहुड. जैसे कि नाम से ज़ाहिर है ये किताब दीप्ति नवल के बचपन और युवा दिनों के बारे में हैं जो उन्होंने अमृतसर में बिताए.
दिल्ली की जो छवि मन में दीप्ति नवल की चश्मे बद्दूर देखकर समाई हुई थी, अब दिल्ली वैसी तो नहीं रही लेकिन इसी शहर के एक ख़ूबसूरत इलाक़े में दीप्ति नवल से मुलाक़ात हुई और उनकी किताब पर बातें हुईं.
रिपोर्टर-वंदना
शूट- देवाशीष कुमार और शहनवाज़
एडिटिंग- देवाशीष कुमार
गेस्ट कोऑर्डिनेटर: संगीता यादव
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