छत्तीसगढ़ में हसदेव अरण्य को बचाने के लिए डटे आदिवासी

वीडियो कैप्शन, कोयले के खनन की वजह से इन जंगलों और यहाँ पाई जाने वाली प्रजातियों पर ख़तरा मंडराने लगा है.

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के हसदेव अरण्य को कोयले के खनन से बचाने के लिए एक दशक से चल रहा आंदोलन अब और तेज़ी पकड़ने लगा है.

यहाँ ‘केटे बासेन कोयला परियोजना’ के दूसरे चरण में खनन को मंज़ूरी भी दे दी गई है और इसे लेकर ज़मीन अधिग्रहण का काम भी जारी है.

इस बीच स्थानीय प्रशासन ने पेड़ों की कटाई शुरू कर दी है, जिसका जमकर विरोध हो रहा है. हसदेव अरण्य का इलाक़ा एक लाख 73 हज़ार हेक्टेयर में फैला हुआ है. कोयले के खनन की वजह से इन जंगलों और यहाँ पाई जाने वाली प्रजातियों पर ख़तरा मंडराने लगा है. छत्तीसगढ़ से बीबीसी संवाददाता सलमान रावी की रिपोर्ट.

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