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गौरैया को आशियाना दिलाते हैं ये शख़्स
प्रदूषण और शहरीकरण की वजह से तापमान बढ़ रहा है, इसलिए गौरैया अब शहरों से दूर जाकर खाने और पानी की तलाश कर रही हैं.
शहर में आवासीय इमारतों के बीच अब गौरैया बहुत कम दिखती हैं. लेकिन गुजरात के पक्षी प्रेमी परेश पटेल कोशिश कर रहे हैं कि इस चिड़िया की आवाज़ शहरों में फिर से गुंजने लगे.
पिछले छह सालों में उन्होंने अपने हाथों से 50 हज़ार घोंसले बनाए हैं. वो इन घोंसलों को लोगों में मुफ़्ता बांटते हैं. देखिए ये रिपोर्ट...
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