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कुपोषण और भुखमरी की समस्या क्यों नहीं ख़त्म हो रही?
यूं तो इंसान पांच दशक पहले चांद पर पहुंच गया, लेकिन इसी दुनिया में आज भी करोड़ों लोगों को चांद रोटी में नज़र आता है. आज भी दो वक्त की रोटी इस दुनिया में सबको नसीब नहीं है और हर दिन न जाने कितने बच्चे पूरी दुनिया में भूख और कुपोषण से दम तोड़ देते हैं, जिसकी कभी सटीक गिनती भी नहीं हो पाती.
संयुक्त राष्ट्र और ग्लोबल हंगर इंडेक्स के आंकड़े इसी ओर इशारा करते हैं. कवर स्टोरी में इसी की चर्चा.
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