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अफ़ग़ानिस्तान: छिपने को क्यों मजबूर हैं महिला जज
उन्होंने अफ़ग़ान महिलाओं के अधिकारों के लिए मोर्चा खड़ा किया था. वो क़ानून की पहरेदार थीं. वो अपने ही मुल्क में हाशिए पर धकेली गई औरतों को इंसाफ़ दिला रही थीं. लेकिन अब अफ़ग़ानिस्तान की वो 220 से ज़्यादा महिला जज तालिबान के राज में ख़ौफ़ में जी रही हैं और छिपी हुई हैं. इनमें से ज़्यादातर ने महिलाओं के ख़िलाफ़ हुई घरेलू हिंसा के क़ानूनी मामलों में फ़ैसले सुनाए थे. उन्होंने जिन दोषी पुरुषों को सज़ा सुनाई थी, अब वो इन्हें मारने की धमकी दे रहे हैं. बीबीसी ने ऐसी ही एक महिला जज से बात की जो अपने भविष्य को लेकर डरी हुई हैं.
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