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तालिबान पर आईएस के हमले, इसके पीछे का संदेश
जब काबुल में अशरफ़ ग़नी की सरकार थी तो अफ़ग़ान सुरक्षाबल नंगरहार और जलालाबाद में जहां एक तरफ़ तालिबान के हमलों का सामना कर रहे थे तो वहीं इस्लामिक स्टेट भी उस सरकार को निशाना बना रहा था.
15 अगस्त को तालिबान की ओर से काबुल का नियंत्रण संभालने के बाद अब अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामिक स्टेट ख़ुरासान (ISKP) ने सीधे तौर पर उसे अपना दुश्मन बना लिया है.
ये भी साफ़ है कि अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका और सहयोगी देशों की फ़ौज के जाने के बाद देश में आईएस का ख़तरा साफ़तौर पर देखा जाने लगा था और तमाम सुरक्षा बंदोबस्त के बावजूद 26 अगस्त को काबुल एयरपोर्ट पर उसने बड़ा आत्मघाती हमला किया.
इस हमले में 13 अमेरिकी सुरक्षाबलों समेत 150 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.
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स्टोरी: अज़ीज़ुल्लाह ख़ान
आवाज़: विदित मेहरा
वीडियो एडिटिंग: मनीष जालुई
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