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तालिबान को क्या अमेरिका ने खड़ा किया?
अमेरिका में वे लोग 'जंग-ए-आज़ादी के सिपाही' कहे जाते थे. लेकिन उन्हें इस्लामी कट्टरपंथी गुरिल्ला लड़ाके कहना ज़्यादा ठीक रहेगा.
अफ़ग़ानिस्तान के स्थानीय गुरिल्ला लड़ाकों के समूहों ने सालों तक अमेरिकी समर्थन के सहारे सोवियत संघ के ख़िलाफ़ झंडा उठाए रखा. अमेरिका ने उन्हें हथियार और पैसे मुहैया कराए ताकि उसके दुश्मन सोवियत संघ के मंसूबों को नाकाम किया जा सके.
गोपनीय दस्तावेज़ों, पत्रकारों की जांच-पड़ताल और उस दौर से जुड़े ख़ास लोगों के बयानों और इंटरव्यूज़ को देखें तो ये बात सामने आती है कि अमेरिका सोवियत संघ को ऐसे दलदल में फँसाना चाहता था, जहाँ उसे जानोमाल का वैसा ही नुक़सान हो जो सालों पहले अमेरिका ने ख़ुद वियतमान में झेला था.
ये अमेरिका का 'ऑपरेशन साइक्लोन' था और उस वक़्त के मीडिया ने इसे अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसी 'सीआईए के इतिहास का सबसे बड़ा ख़ुफ़िया अभियान' क़रार दिया था.
रिपोर्टः गुइल्लेर्मो डी ओल्मो
आवाज़ः नवीन नेगी
वीडियो एडिटः रुबाइयत बिस्वास
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