तालिबान का असर: कोई नहीं ख़रीद रहा जींस, स्कार्फ़ की बिक्री बढ़ी

जब तालिबान ने काबुल पर क़ब्ज़ा किया, तो यहां रहने वाले लोग बेहद डरे हुए थे. लेकिन युवा महिला पत्रकार रोवैना ने तय किया कि उन्हें अपने यूट्यूब चैनल के लिए उनसे बात करनी चाहिए. ये उनका अपलोड किया आख़िरी वीडियो है.

अब रोवैना को नहीं पता कि तालिबान उन्हें काम करने की इजाज़त देगा या नहीं. कई कंपनियों ने अभी महिला कर्मचारियों को अपने-अपने घर पर रहने के लिए कहा है.

कई महिला प्रोफेशनल डर की वजह से भाग गईं. तालिबान ने जब 1990 के दशक में यहां सत्ता संभाली थी तो महिलाएं काम नहीं कर सकती थीं, लड़कियां स्कूल नहीं जा सकती थीं. वो भी ‘दोषियों’ को कोड़े मारने और पत्थरों से जान से मारने जैसी सज़ा का बचाव करते हैं.

तालिबान के शासन में आने के बावजूद आप काबुल में अब भी कुछ महिलाओं को देख सकते हैं लेकिन ये पहले से काफ़ी कम हैं. कई महिलाओं को बाहर आने में डर लग रहा है. काबुल से बीबीसी संवाददाता सिकंदर किरमानी की रिपोर्ट.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)