तालिबान के आने से क्या अल-क़ायदा और आईएस फिर मज़बूत होंगे?

अफ़ग़ानिस्तान के सुदूर कुनार प्रांत की एक घाटी में ऑनलाइन जिहादी चैट फ़ोरम पर चरमपंथी संगठन अल-क़ायदा के समर्थक ख़ुशियाँ मना रहे हैं.

ये लोग अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की जीत को 'ऐतिहासिक विजय' मान रहे हैं. अफ़ग़ानिस्तान से उन सुरक्षाबलों के बाहर जाने से पूरी दुनिया में फैले पश्चिम विरोधी जिदाही समूहों को बड़ा उत्साह मिला है, जिन्होंने आज से 20 साल पहले यहीं की ज़मीन पर तलिबान और अल-क़ायदा को अस्थायी रूप से खदेड़ दिया था.

इसके बाद इराक़ और सीरिया में हार के बाद नई ज़मीन तलाश रहे कथित इस्लामिक स्टेट जैसे चरमपंथी संगठनों से जुड़े लड़ाकों के लिए अब अफ़ग़ानिस्तान के वो अनियंत्रित स्थान पैर जमाने का नया अड्डा बन सकते हैं, जहाँ तालिबान ने बीते दशक बिताए हैं.

पश्चिमी देशों के सैन्य अधिकारी और राजनेता चेतावनी देते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान में अल-क़ायदा पहले से कहीं अधिक ताक़त के साथ वापसी कर सकता है.

स्टोरीः फ्रैंक गार्डनर

आवाज़ः पायल भुयन

वीडियो एडिटः देबलिन रॉय

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