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तालिबान शासन कैसा होता है, इस महिला से सुनिए
राहिला पिछले हफ्ते अफ़ग़ानिस्तान से इलाज कराने दिल्ली आई हैं. उनका पूरा परिवार उनके साथ है. वो अब वापस लौटना नहीं चाहती. वो भारत सरकार से अपने वीजा में एक्सटेंशन देने की मांग कर रही हैं.
अफ़ग़ानिस्तान से भारत में इलाज कराने आए लोग, यहां पढ़ रहे छात्र और शरणार्थी कार्ड पर रह रहे लोग गुज़ारिश कर रहे हैं कि उन्हें यहीं रहने दिया जाए.
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का नियंत्रण होने के बाद भारत का वीज़ा मांगने की वालों की तादाद बहुत ज़्यादा बढ़ी है.
भारत ने काबुल में अपना दूतावास बंद कर दिया है और राजदूत समेत अन्य कर्मचारियों को वापस बुला लिया है. भारत ने मंगलवार को अफ़ग़ान नागरिकों के लिए आपात वीजा की घोषणा की है.
भारत के गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि भारत आने की इच्छा रखने वाले अफ़ग़ानिस्तान के नागरिक वीज़ा के लिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं.
भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में फंसे हिंदू और सिखों को त्वरित वीज़ा देने और वहां से निकालने की प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है.
वहीं विदेश मंत्रालय के एक शीर्ष सूत्र ने बताया कि आपात वीज़ा धर्म के आधार पर नहीं होगा. उन्होंने कहा, 'अफ़ग़ानिस्तान में बहुत से लोगों ने भारत की मदद की है, यदि वो भारत आना चाहेंगे तो भारत उनकी मदद करेगा.'
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का शासन आने के बाद से लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. सबसे ज़्यादा चिंता महिलाओं की सुरक्षा की है. तालिबान ने कहा है कि वो किसी को निशाना नहीं बनाएंगे लेकिन लोगों को तालिबान पर बहुत भरोसा नहीं है.
मीरवाइज़ कहते हैं, 'हमने तालिबान के जवान लड़कियों को घर से उठाने की रिपोर्टें सुनी हैं. बदख़्शा और तख़र प्रांत से ऐसी रिपोर्टें आई हैं. हमें अपनी बेटी को लेकर बहुत डर है. अफ़ग़ानिस्तान तो हम नहीं लौटेंगे.'
वीडियो: दिलनवाज़ पाशा/पीयूष नागपाल
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