बिहार में बाढ़ की वजह से बिगड़े हालात, दर-दर भटक रहे हैं लोग
हर साल की तरह बिहार में इस बार भी बाढ़ की वजह से स्थिति गंभीर है. राज्य के 15 ज़िलों में बाढ़ से करीब 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं.
उत्तरी बिहार में जहां गंगा, बागमती, कोसी, बूढ़ी गंडक समेत कई नदियां ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही हैं वहीं बक्सर से लेकर भागलपुर तक गंगा में भी पानी का स्तर बढ़ा है.
दरअसल पिछले साल की तुलना में इस साल सामान्य से अधिक (69 प्रतिशत ) बारिश हुई है. सबसे अधिक पश्चिमी चम्पारण में सामान्य (344.7 मिली मीटर ) से 245% अधिक यानी कुल 1190 मिलीमीटर बारिश हुई है.
इसके अलावा दरभंगा, समस्तीपुर, सारण, मधुबनी, सिवान और सुपौल में भी सामान्य से 100 से 150% अधिक वर्षा हो चुकी है. इसके चलते हज़ारों एकड़ खेत में पानी के जमाव से फसल बर्बाद हुई है और लोग सड़कों पर रहने को मज़बूर हैं.
राज्य सरकार दावा कर रही है कि लाखों लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है लेकिन कोरोना संकट के दौर में राहत और बचाव कार्य प्रभावित हुए हैं. राज्य में एनडीआरएफ की सात और एसडीआरएफ की नौ टीमें तैनात हैं जो राहत और बचाव कार्य को अंजाम दे रही हैं.
राज्य सरकार की ओर से 16 लाख से ज़्यादा बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए दो सौ से ज़्यादा कम्युनिटी किचन शुरू हो पाए हैं, इतने कम कम्युनिटी किचन से सभी प्रभावित लोगों तक राहत नहीं पहुंच पा रही है.
बिहार सरकार कोसी और गंडक नदी पर बने सभी तटबंधों को सुरक्षित बता रही है हालांकि सुपौल ज़िले में एनएच 57 होते हुए निर्मली अनुमंडल के छुटियाही गांव के समीप सिकरहट्टा-मझारी निम्न सुरक्षा बांध 100 फीट लंबा और 20 फीट गहरा टूटने से पश्चिमी कोसी तटबंध के आसपास बसे कई गांवों में लोग चार-पांच फुट पानी में रहने को मजबूर हैं या फिर सड़कों पर उन्हें शरण लेनी पड़ी है.
इन लोगों को ज़िला प्रशासन के कम्युनिटी किचन से राहत मिल रही है. वैसे यह तटबंध स्थानीय लोगों ने आपसी मदद से बनाया था लिहाजा सरकारी रिकॉर्ड में यह तटबंध के तौर पर दर्ज भी नहीं है. बिहार में हर साल अमूमन 15 सितंबर तक बाढ़ की स्थिति बनी रहती है.
रिपोर्ट एवं वीडियो: राहुल कुमार गौरव, सुपौल (बिहार) से बीबीसी के लिए
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