मनमोहन सिंह ने आर्थिक उदारीकरण का फ़ैसला क्यों लिया था?

वीडियो कैप्शन, अगर ये काम ना होता तो भारत कंगाल हो जाता

साल 1988 में ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने प्रधानमंत्री राजीव गांधी से कहा था कि भारत आर्थिक संकट की तरफ़ तेज़ी से जा रहा है जिससे बचने के लिए आप एक लोन ले लीजिए. फिर क्या हुआ?

30 साल पहले साल 1991 में भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐसा दौर शुरू हुआ जिसने भारत की तकदीर हमेशा के लिए बदल दी. लेकिन किन वजहों ने भारत को ये फ़ैसला लेने पर मजबूर किया?

आवाज़: सारिका सिंह

वीडियो: देवाशीष कुमार

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)