'मेरा ख़तना हुआ, बेटी का नहीं होने दूंगी'

महिलाओं का ख़तना मिस्र में साल 2008 में बैन कर दिया गया था लेकिन अभी भी इस देश में ख़तना के मामले दुनिया में सबसे ज़्यादा हैं.

रुढ़िवादी मुसलमानों के बीच महिलाओं को तब तक "अशुद्ध" और "शादी के लिए नहीं तैयार" माना जाता है जब तक उनका ख़तना न किया जाए. हालांकि क़ानूनी तौर ख़तना करने का दोषी पाए गए डॉक्टरों को सात साल तक की सज़ा सुनाई जा सकती है.

इसके अलावा ख़तना करने की मांग करने वालों को भी तीन साल तक की सज़ा सुनाई जा सकती है. 39 साल की जमीला का ख़तना तब हुआ था जब वो नौ साल की थीं.

असहनीय दर्द और मानसिक तनाव के अलावा, जमीला के मुताबिक इस घटना ने उन्हें बदल दिया.जमीला को अपने पति के साथ सेक्स करने में अभी भी दर्द होता है. वो अपनी बच्ची के साथ ऐसा नहीं होने देना चाहतीं. इसलिए उन्होंने एल्डनबुकी का एक लेक्चर भी करवाया.

स्टोरी: सरोज पतिराना

आवाज़: गुरप्रीत सैनी

वीडियो एडिटिंग शुभम कौल

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