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ईद की मीठी इमली, झूले और झुनझुना सब कहां ग़ायब हो गए?
रमज़ान के पूरे महीने रोज़े रखने के बाद जब मीठी ईद आती है तो लोगों के चेहरों पर खुशी दौड़ने लगती है. ख़ासकर बच्चे इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार करते. वो घर के बड़ों से ईदी पाते और मेले या बाज़ार पहुंचकर अपनी पसंद की चीज़ें खरीदते.
लेकिन धीरे-धीरे माहौल ऐसा होता गया कि ईद की तमाम ख़ुशियां कम होती चली गईं. अब तो माहौल ऐसा है कि बच्चे या बड़े कोई भी ईद की खुशी में बाहर निकलना तो दूर किसी को गले भी नहीं लगा सकता. देखिए इसी पर पाकिस्तान से वुसअतुल्लाह ख़ान की यह टिप्पणी.
वीडियो एडिटः रुबाइयत बिस्वास
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