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फ़ेक पॉर्न वीडियो बनाने में इस्तेमाल हो रही ये तकनीक
ये तकनीक किसी बड़े सेलेब्रिटी की हूबहू कॉपी बना सकती है. डीपफ़ेक तकनीक के ज़रिए यह बता पाना मुश्किल है कि क्या असली है और क्या नकली.
विशेज्ञषों का कहना है कि इस तकनीक में आने वाले बदलाव अंतहीन होंगे. ये तकनीक बनाने वाले लोगों का कहना है कि इसके ज़रिए उन मृत लोगों को दोबारा दिखा पाएंगे जिनको अब हम देख नहीं सकते.
लेकिन इस नई तकनीक का ग़लत इस्तेमाल भी किया जा रहा है. 90% से अधिक डीपफ़ेक तकनीक पोर्न कंटेंट बनाने के लिए इस्तेमाल हो रही है.
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