कहानी ज़िंदगी की- 10: ख़ूनी कीचड़
ये है बीबीसी हिंदी का ताज़ातरीन पॉडकास्ट 'कहानी ज़िंदगी की'
'कहानी ज़िंदगी की' के हर एपीसोड में रूपा झा आपको सुना रही हैं भारतीय भाषाओं में लिखी ऐसी चुनिंदा कहानियां जो अपने आप में बेमिसाल हैं, जो हमारी और आपकी ज़िंदगी में झांकती हैं और सोचने को मजबूर भी करती हैं.
इस बार की कहानी है ख़ूनी कीचड़.
ये मूल रूप से मराठी में लिखी गई कहानी 'लाल चिखल' का हिंदी अनुवाद है.
ये कहानी मराठी भाषा के चर्चित साहित्यकार भास्कर चंदनशिव ने लिखी है. उन्होंने इस कहानी के जरिए किसानों की दिक्कतों को सामने रखा है. ये कहानी बताती है कि एक किसान परिवार किन दिक्कतों से जूझते हुए फसल तैयार करता है लेकिन बाज़ार में उन्हें मेहनत की कीमत नहीं मिल पाती.
भास्कर की कहानियों में ग्रामीण परिवेश की झलक और वहां रहने वाले आम लोगों के जीवन का चित्रण मिलता है. जीवन के विभिन्न पहलुओं को छूकर गुजरती उनकी कहानियां पढ़ने और सुनने वालों को पात्रों के साथ जोड़ देती है.
कहानी- ख़ूनी कीचड़ (मूल नाम- लाल चिखल)
लेखक- भास्कर चंदनशिव
हिंदी अनुवाद- सचिन परब
वाचन - रूपा झा
ऑडियो मिक्सिंग- जितेंद्र सासन
इलस्ट्रेशन- गोपाल शून्य
आलाप- शिल्पी
प्रस्तुतकर्ता- मोहन लाल शर्मा
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