You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
लद्दाख की चरवाहा संस्कृति पर ख़तरा
मुश्किल मौसम, सूदूर इलाकों में अकेलापन, दूर दूर तक पैदल ही सफ़र करना और इसके साथ कई और दुश्वारियां.
इनसे रोज़ दो चार होते हुए भी लद्दाख में कई चरवाहे रहते हैं. समुद्र तल से हज़ारों फ़ीट की ऊंचाई वाली ये जगह ठंड के मौसम में चरागाह का काम करती है.
पर अब शायद उनके बाद ये काम करने वाला यहां और कोई नहीं होगा. ये लोग लद्दाख के सबसे पुराने गांव ग्या से ताल्लुक रखते हैं.
ख़ानाबदोश की तरह रहने वाले इन लोगों ने इस मौसम में ग्या-क्यामार घाटी की ओर पलायन कर लिया है.
क्यों ये लोग ये जगह और जिंदगी का ये तरीका दोनों ही छोड़ रहे हैं. बीबीसी संवाददाता आमिर पीरज़ादा ने क्यामार घाटी के ग्या गांव जाकर ये जानने की कोशिश की.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)